ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनाई के निधन पर भारत सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी न होने से देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने लेख में कहा कि यह चुप्पी तटस्थता का संकेत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की घटनाओं पर भारत को स्पष्ट और संतुलित रुख सामने रखना चाहिए।
संसद में बहस की मांग
सोनिया गांधी ने मांग की है कि बजट सत्र दोबारा शुरू होने पर वैश्विक परिस्थितियों और सरकार की “चिंताजनक चुप्पी” पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए गंभीर संकेत होती है, और भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को इस पर स्पष्ट विचार रखना चाहिए।
विदेश नीति की विश्वसनीयता पर सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात नहीं रखता, तो इससे देश की विदेश नीति की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के शुरुआती बयानों को अधूरा बताते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर समग्र दृष्टिकोण सामने आना चाहिए।
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सोनिया गांधी के लेख को साझा करते हुए लिखा कि “चुप रहना तटस्थता नहीं है” और भारत को संप्रभुता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और सियासी गलियारों में और गर्मा सकता है।



