छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सरकारी धान संग्रहण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 15 महीने तक खुले में पड़ा धान अब करोड़ों रुपये के नुकसान का कारण बन चुका है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल 11 हजार क्विंटल धान को लेकर है, जिसकी स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। वहीं जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने के बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, धान उठाव के लिए राजधानी से 153 डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) जारी किए गए थे, लेकिन अंतिम समय में इन्हें निरस्त कर दिया गया। यदि समय पर धान का उठाव हो जाता, तो सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के नुकसान से बचाया जा सकता था। डीओ रद्द होने के बाद धान संग्रहण केंद्र में ही पड़ा रहा और उचित भंडारण व रखरखाव के अभाव में उसकी गुणवत्ता लगातार गिरती गई। अब बड़ी मात्रा में धान खराब हो चुका है।
जिम्मेदारी से बचते अधिकारी
जब पूरे मामले पर जिला विपणन अधिकारी (DMO) से सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया कि इसकी जानकारी मंत्रालय से ली जाए। इस बयान ने विभागीय जवाबदेही पर और सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जिले में धान संग्रहण और उठाव की जिम्मेदारी किसकी है और करोड़ों के नुकसान का जवाब कौन देगा?
11 हजार क्विंटल धान पर बड़ा सवाल
सूत्रों के मुताबिक, खराब हुए धान के अलावा करीब 11 हजार क्विंटल धान का रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। इसे लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मांग की जा रही है कि पूरे स्टॉक का भौतिक सत्यापन कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि धान संग्रहण केंद्रों में पर्याप्त गोदाम, सुरक्षा और भंडारण की व्यवस्था नहीं थी। समय पर उठाव नहीं होने से सरकारी अन्न खराब हुआ, जो किसानों की मेहनत और जनता के पैसे का सीधा नुकसान है। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और नुकसान की जवाबदेही तय करने की मांग की है।





