केंद्र सरकार के नए कानून का विरोध, “मजदूरों की आवाज दबाने नहीं देंगे” — अनिल दुबे

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम संशोधन कानूनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ में मजदूर संगठनों का विरोध तेज हो गया है। राजधानी रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ी भवन में आयोजित बैठक में विभिन्न श्रमिक, किसान और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के फैसले को मजदूर हितों के खिलाफ बताया।

बैठक में उपस्थित श्रमिक नेताओं का कहना था कि नए नियमों से मजदूरों की रोजी-रोटी और रोजगार सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा, जबकि बड़े उद्योगपतियों को इसका लाभ मिलेगा। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है जिससे श्रमिक वर्ग कमजोर हो रहा है।

राज्य आंदोलनकारी एवं श्रमिक नेता अनिल दुबे ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाले किसी भी फैसले का विरोध लगातार जारी रहेगा। उन्होंने मांग की कि पूर्व में श्रमिकों को मिले अधिकारों को बहाल किया जाए और श्रमिक विरोधी संशोधनों को तत्काल वापस लिया जाए।

बैठक में गंगाराम साहू, श्यामाराम सेन, रूप सिंह निषाद, अंकित साहू, अभिषेक साहू, मनुबाई पटेल, रामेश्वर चौहान, मनोज देवांगन, गणेश यादव और मुकेश नायक सहित कई सामाजिक एवं श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि मजदूरों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर नए संशोधन कानूनों को वापस लेने की मांग भी उठाई है। नेताओं का कहना है कि यदि सरकार ने मजदूरों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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