भोपाल। मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक कमलनाथ ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर राज्य को “कर्ज़ के दलदल” में धकेलने का आरोप लगाया है।
कमलनाथ ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की ताज़ा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश पर सरकारी कर्ज़ 5 लाख करोड़ रुपये की सीमा को पार कर चुका है। उनका दावा है कि यह देश के कुल राज्यों के कर्ज़ का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के जरिए भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि वर्ष 2007 में राज्य पर करीब 52 हजार करोड़ रुपये का कर्ज़ था, जो अब लगभग दस गुना बढ़ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में वित्तीय अनुशासन की कमी और गैर-जरूरी खर्चों के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है।
कमलनाथ ने सरकार पर “इवेंट आधारित राजनीति” और फिजूलखर्ची का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग बुनियादी सेवाओं के बजाय प्रचार और आयोजन में किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जबकि सरकारी खजाना लगातार कर्ज़ के बोझ तले दबता जा रहा है।
उन्होंने राज्य सरकार से राजकोषीय स्थिति की गंभीर समीक्षा करने और जनहित में ठोस कदम उठाने की मांग की है।
हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए प्रदेश में आर्थिक मुद्दों पर सियासी बहस और तेज हो सकती है।







