रायपुर:छत्तीसगढ़ में राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तैयारी पूरी कर ली है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद मंगलवार से प्रदेशभर में यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस बार राज्य में कुल 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार मतदाता दर्ज हैं।
पिछले आंकड़ों के अनुसार, पंचायत चुनाव के समय मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 11 लाख 5 हजार 391 थी, जिसमें 1 करोड़ 4 लाख 27 हजार 834 पुरुष, 1 करोड़ 6 लाख 76 हजार 821 महिला और 736 तृतीय लिंग मतदाता शामिल थे।
राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर के तहत पुराने और नए वोटर लिस्ट का मिलान किया गया है। प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ सर्वे शुरू होगा। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया में नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे और पुरानी सूची में दर्ज त्रुटियों को सुधारा जाएगा। बीएलओ (BLO) घर-घर जाकर 2003 की सूची से तुलना करेंगे और कमियों को दूर करेंगे।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने फैसले का किया स्वागत
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि “मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के ही नाम होने चाहिए। एसआईआर का यह कदम लोकतंत्र की पारदर्शिता के लिए आवश्यक है।”
भूपेश बघेल ने उठाए सवाल, कहा- ‘अवैध प्रवासियों की पहचान बताएं’
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार दोनों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर पारदर्शिता की बजाय भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है।
दिल्ली रवाना होने से पहले रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि बिहार में कितने बांग्लादेशी या विदेशी नागरिक चिन्हित हुए और उनमें से कितनों को सूची से हटाया गया। केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि छत्तीसगढ़ में कितने पाकिस्तानी नागरिक मौजूद हैं।”
बघेल ने यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद गृह मंत्रालय ने तीन दिनों में पाकिस्तानी नागरिकों को देश से बाहर करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कांग्रेस का आरोप – भाजपा के लिए बनाई जा रही चुनावी जमीन
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के इस कदम को लोकतंत्र विरोधी षड्यंत्र करार दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के अनुकूल माहौल तैयार करने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग अब भाजपा का मोर्चा संगठन बन चुका है। SIR शुरू करने से पहले मतदाता सूची का डेटा सभी राजनीतिक दलों को देना चाहिए था। लेकिन यह प्रक्रिया पारदर्शिता से दूर है।”
वर्मा ने आगे कहा कि “बिहार और महाराष्ट्र में मतदाता सूची में गड़बड़ियों के जो प्रमाण सामने आए हैं, वे भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत को साबित करते हैं।” उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची अपडेट करना नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के फायदे के लिए लोकतंत्र को कमजोर करना है।



