रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) में एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्थाओं की खामियां सामने आ गईं। वार्ड बॉय की अनुपलब्धता के कारण मंगलवार को मरीज के परिजन (अटेंडर) और डॉक्टरों के बीच तीखी झड़प हो गई। घटना उस समय हुई जब मरीज को ICU में शिफ्ट करना था, लेकिन कोई सपोर्ट स्टाफ न होने की वजह से यह जिम्मेदारी भी डॉक्टरों के कंधों पर आ गई।
यह कोई पहली घटना नहीं है। मेकाहारा में लंबे समय से स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यहां करीब 500 पद खाली हैं, जिनमें वार्ड बॉय, नर्स, टेक्नीशियन, लैब असिस्टेंट और अन्य जरूरी सहयोगी स्टाफ शामिल हैं।
इस कमी का सीधा असर डॉक्टरों पर पड़ रहा है, खासकर जूनियर डॉक्टरों पर। JUDA (जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन) के डॉक्टरों का कहना है कि स्टाफ की कमी से न सिर्फ इलाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि डॉक्टरों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
JUDA के अध्यक्ष डॉ. दीपक साहू ने बताया कि वे कई बार सरकार और प्रशासन से नियुक्तियों की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें न सिर्फ मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है, बल्कि स्ट्रेचर खींचने, ऑक्सीजन सिलेंडर उठाने और फाइल ले जाने जैसे काम भी खुद करने पड़ रहे हैं।







