नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित ‘हरा-भरा स्वराज : राजीव गांधी के विजन को एक श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्वराज, पर्यावरण, मोबाइल और सोशल मीडिया, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की पसंद, राजनीति और देश के हर नागरिक के अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी।
राहुल गांधी ने कहा कि स्वराज का मतलब सिर्फ आजादी या फ्रीडम नहीं है। स्वराज का मतलब है अपने ऊपर खुद शासन करना और अपनी जिम्मेदारियों को समझना। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे व्यक्ति को स्वराज दिया नहीं जा सकता, क्योंकि यह हर इंसान की अपनी व्यक्तिगत यात्रा है।
स्वराज का मतलब खुद को समझना
राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को गुस्सा या नफरत आती है तो उसे खुद से यह सवाल करना चाहिए कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। अपने व्यवहार और भावनाओं को समझना ही स्वराज की दिशा में पहला कदम है।
उन्होंने महात्मा गांधी की किताब का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधीजी ने इसे ‘सत्य’ नहीं बल्कि ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ कहा था। उनका कहना था कि हर व्यक्ति का अपना अनुभव और अपना सच होता है। कोई दूसरा व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि सामने वाले का सत्य क्या है।
‘मोबाइल 21वीं सदी का पिंजरा है’
राहुल गांधी ने मोबाइल और स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थी लगातार 24 घंटे स्क्रीन देखते रहते हैं और तकनीक धीरे-धीरे एक तरह के पिंजरे में बदल रही है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल और तकनीक से जानकारी, कारोबार और संचार में काफी फायदा मिलता है, लेकिन इससे स्वराज हासिल नहीं होगा। अपने जीवन और फैसलों की जिम्मेदारी खुद लेना जरूरी है।
आरएसएस पर भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने कहा कि उनकी आरएसएस से मूल समस्या यह है कि वह मानता है कि वह देश के करीब डेढ़ अरब लोगों का सत्य जानता है। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे व्यक्ति के अनुभव और जीवन को पूरी तरह समझना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई छात्र या आम नागरिक अपनी बात लेकर उनके पास आता है तो उनका काम उसके सत्य को तय करना नहीं, बल्कि उसकी बात सुनना और समझने की कोशिश करना है।
युवाओं को अपना रास्ता चुनने की आजादी मिले
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं को अपनी पसंद का करियर चुनने की आजादी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई इंजीनियर बनना चाहता है तो उसे इंजीनियर बनना चाहिए, लेकिन अगर कोई शेफ, जूते बनाने वाला या कोई दूसरा काम करना चाहता है तो उसे अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार और देश का काम युवाओं के लिए अवसरों के दरवाजे खोलना है, न कि उनके लिए पहले से तय कर देना कि उन्हें क्या करना है।
आर्थिक व्यवस्था पर भी सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि स्वराज की व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब देश में आर्थिक अवसर कुछ लोगों तक सीमित न रहें। उन्होंने शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, वित्तीय व्यवस्था और राजनीतिक भागीदारी में बदलाव की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जो इतनी महंगी हो कि आम व्यक्ति उससे दूर हो जाए। परीक्षा व्यवस्था भी निष्पक्ष होनी चाहिए और देश की राजनीतिक व्यवस्था पंचायत से लेकर संसद तक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने वाली होनी चाहिए।
हर व्यक्ति को महसूस हो कि वह देश का हिस्सा है
राहुल गांधी ने कहा कि देश में हर व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि वह इस देश का हिस्सा है और उसे सम्मान मिलता है। धर्म, जाति, समुदाय या लिंग के आधार पर किसी को भी यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वह देश में पराया है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी, दलित, मुस्लिम, ईसाई, सिख और समाज के हर वर्ग के लोगों की अपनी परिस्थितियां और अनुभव हैं। उनकी बात सुनना और उनके अनुभव को समझना जरूरी है।
‘हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है’
अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि हर व्यक्ति अपने आप में खास और महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की आर्थिक या सामाजिक स्थिति चाहे जैसी हो, राष्ट्र को उसकी परेशानियों में उसकी मदद करनी चाहिए और उसे यह महसूस कराना चाहिए कि वह देश का अभिन्न हिस्सा है।
राहुल गांधी ने कहा कि स्वराज सिर्फ राजनीतिक व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और अपनी पहचान से जुड़ा हुआ विचार है। उन्होंने युवाओं से अपनी अभिव्यक्ति और ऊर्जा का इस्तेमाल देश की शिक्षा व्यवस्था और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने की अपील की।





