हेमचंद यादव विवि स्कैम: भ्रष्ट और व्यभिचारी कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को तुरंत बर्खास्त किया जाए – SFI

Madhya Bharat Desk
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एसएफआई का आरोप: शासन-प्रशासन और पुलिस मिलकर भ्रष्ट कुलसचिव को दे रहे हैं संरक्षण

रायपुर/दुर्ग:स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त करने की जोरदार मांग की है। एसएफआई ने राज्य शासन और पुलिस प्रशासन पर कुलसचिव को खुला संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है।

एसएफआई के रायपुर जिलाध्यक्ष गर्व गभने, जिला सचिव हर्ष संघानी और उपाध्यक्ष अल्पिका कन्नौजे ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के पिछले तीन महीनों में एक के बाद एक कई कारनामे उजागर हुए हैं। इनमें फर्जी पीएचडी, गलत अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति, व्यक्तिगत विवाद में सरकारी कार तुड़वाने और उसकी मरम्मत में गंभीर वित्तीय अनियमितता, जालसाजी तथा दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी का आर्थिक व मानसिक शोषण शामिल है।

हल्की धाराओं में FIR दर्ज कर आरोपी को बचाने में जुटी पुलिस
एसएफआई नेताओं ने मोहन नगर थाना पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दैनिक वेतनभोगी महिला से घर का काम कराने और डरा-धमकाकर उसके वेतन का 84% हिस्सा अपने बेटे के खाते में ट्रांसफर कराने का मामला विश्वविद्यालय की जांच समिति में पूरी तरह सत्य पाया गया था। इसके बावजूद पुलिस ने काफी हीला-हवाली के बाद बेहद हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया और आरोपी को थाने से ही जमानत दे दी।

एसएफआई का आरोप है कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308, 316, 318, 352/351 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA 1988) की धारा 7 व 13 के तहत अपराध दर्ज होना चाहिए था, क्योंकि विस्तृत डिजिटल सबूत मौजूद थे। लेकिन पुलिस ने जानबूझकर केवल BNS की धारा 316(4) लगाई।

एफआईआर से बेटे का नाम गायब, 7 साल से कम की धाराओं का किया खेल
विज्ञप्ति में कहा गया है कि पीड़िता ने अपनी शिकायत में स्पष्ट कहा था कि पैसा कुलसचिव के बेटे उदय कुलदीप के खाते में जाता था, लेकिन पुलिस ने एफआईआर में उदय कुलदीप का नाम गायब कर केवल “एक खाते में ट्रांसफर होता था” लिखा है।

एसएफआई ने दावा किया कि पुलिस ने जानबूझकर 7 साल से कम सजा वाली धाराओं का प्रयोग किया है, ताकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और BNS धारा 35 का सहारा लेकर आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय नोटिस थमाकर छोड़ दिया जाए।

कार तोड़फोड़ व व्यभिचार के मामले में भी कार्रवाई नहीं, सरकार पर साधा निशाना
एसएफआई ने बताया कि निजी झगड़े के कारण सरकारी कार में हुई तोड़फोड़ और उसकी मरम्मत में गड़बड़ी की जांच उच्च शिक्षा विभाग ने कराई थी। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुलसचिव पर लगे सभी आरोपों को सही पाया है, लेकिन विभाग ने केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर औपचारिकता पूरी की।

एसएफआई ने तंज कसते हुए कहा कि भ्रष्ट और व्यभिचारी कुलसचिव को बचाने में पूरा शासन-प्रशासन लगा हुआ है। संघ और भाजपा सरकार हमेशा ऐसे तत्वों के पक्ष में खड़ी नजर आती है। एसएफआई ने शिक्षा मंत्री से कहा कि यदि यह कुलसचिव इतने ‘होनहार’ हैं, तो उन्हें भले ही मंत्रिमंडल में शामिल कर लें, लेकिन विश्वविद्यालयों को ऐसे कुकर्मियों से मुक्त रखें।

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