संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार (4 अगस्त 2026) को राज्यसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। इससे पहले 31 जुलाई 2026 को यह बिल लोकसभा से भी पास हो चुका था। अब यह संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है।
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। इससे फर्जी जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी और सरकारी रिकॉर्ड भी ज्यादा प्रमाणिक होंगे।
देरी से पंजीकरण कराने के नियम हुए सख्त
सरकार ने साफ किया है कि सामान्य पंजीकरण की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह जन्म या मृत्यु होने के 21 दिनों के भीतर सूचना देने पर बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के पंजीकरण हो जाएगा। अगर 21 दिन से लेकर एक साल के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो तय नियमों के अनुसार विलंब शुल्क देकर यह काम कराया जा सकेगा।
हालांकि नए संशोधन के बाद अगर एक साल से ज्यादा और दो साल के भीतर पंजीकरण कराना है, तो जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी की अनुमति लेना जरूरी होगा।
वहीं अगर दो साल से ज्यादा की देरी से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराया जाता है, तो अब केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही यह संभव होगा। साथ ही संबंधित अधिकारी को अनुमति देने से पहले सभी दस्तावेजों और तथ्यों की जांच भी करनी होगी, ताकि सिर्फ वास्तविक मामलों में ही देर से पंजीकरण की अनुमति दी जाए।
सरकार ने बताया क्यों जरूरी था बदलाव
केंद्र सरकार का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र किसी भी नागरिक की पहली कानूनी पहचान होता है। इसी के आधार पर आगे चलकर आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने, स्कूल-कॉलेज में प्रवेश और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने जैसी कई जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं।
सरकार के मुताबिक, अगर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कई साल बाद बिना सही जांच के कर दिया जाए, तो फर्जी पहचान बनाने, धोखाधड़ी, संपत्ति विवाद और सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाती है। इसी वजह से दो साल से ज्यादा की देरी वाले मामलों में न्यायिक अनुमति अनिवार्य की गई है।
सरकार ने यह भी कहा कि जो लोग तय समय-सीमा के भीतर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराते हैं, उन्हें इस संशोधन से किसी तरह की अतिरिक्त परेशानी नहीं होगी। नए नियम सिर्फ उन मामलों पर लागू होंगे, जहां लंबे समय बाद पंजीकरण कराने के लिए आवेदन किया जाएगा।
2023 के कानून को और मजबूत करेगा नया संशोधन
सरकार के अनुसार, यह संशोधन जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 को और मजबूत करेगा। वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु का राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार करने, राज्यों के बीच डेटा साझा करने और जन्म प्रमाण पत्र को कई सरकारी सेवाओं के लिए अहम दस्तावेज के रूप में मान्यता देने का प्रावधान किया था।
नया संशोधन इसी व्यवस्था को और मजबूत बनाते हुए देर से होने वाले पंजीकरण पर कानूनी निगरानी बढ़ाता है।
विपक्ष के हंगामे के बीच बिल हुआ पारित
विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में विपक्षी दलों ने जमकर नारेबाजी की। विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग की और अयोध्या राम मंदिर दान का मुद्दा भी उठाया।
कार्यवाही दो बार स्थगित होने के बाद दोपहर 2 बजे सदन की बैठक फिर शुरू हुई। इसके बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर विचार और उसे पारित करने का प्रस्ताव रखा।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि संसद सुचारु रूप से नहीं चल रही है और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री को सदन में मौजूद रहकर चर्चा करनी चाहिए।
बहस का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार देश में हर बच्चे के जन्म और हर व्यक्ति की मृत्यु का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इससे हर नागरिक को उसके कानूनी अधिकार और सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
राय ने विपक्ष से विधेयक के उद्देश्य को समझने की अपील की और कहा कि मृत लोगों के नाम मतदाता सूची में बने रहने जैसी समस्याओं को रोकना भी इस व्यवस्था का एक अहम उद्देश्य है। उन्होंने कांग्रेस पर जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। हंगामे और शोर-शराबे के बीच आखिरकार राज्यसभा ने ध्वनिमत से इस विधेयक को पारित कर दिया।







