रायपुर/दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में कमिश्नर का पद खाली होने का असर अब कर्मचारियों पर भी पड़ने लगा है। निगम के करीब 1500 अधिकारी-कर्मचारियों को जुलाई महीने की सैलरी अब तक नहीं मिली है।
दरअसल, 11 जुलाई को तत्कालीन कमिश्नर सुमित अग्रवाल को रायपुर बुलाकर SUDA का CEO बना दिया गया था। इसके बाद उन्होंने निगम उपायुक्त को कमिश्नर का चार्ज सौंप दिया। लेकिन उपायुक्त के पास वेतन जारी करने का अधिकार नहीं होने से कर्मचारियों का वेतन अटक गया।
आमतौर पर महीने की शुरुआत में कर्मचारियों की सैलरी उनके खातों में पहुंच जाती है, लेकिन 13 अगस्त तक भी भुगतान नहीं हो पाया। इसे लेकर कर्मचारी संघ ने नगरीय प्रशासन संचालक से मुलाकात की। अधिकारियों ने जल्द वेतन भुगतान की व्यवस्था करने का भरोसा दिया, लेकिन नया कमिश्नर कब नियुक्त होगा, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है।
कमिश्नर की पोस्टिंग को लेकर क्यों फंसा मामला?
दुर्ग नगर निगम में नए कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर विभाग में अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। बताया जा रहा है कि मंत्री अरुण साव की ओर से विभागीय अधिकारी को आयुक्त बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं, पोस्टिंग की फाइल समन्वय में भेजे जाने के बाद मामला और लंबा खिंच गया है।
अधिकारियों के बीच कथित मतभेद को भी पोस्टिंग में देरी की वजह बताया जा रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने इस तरह के किसी टकराव से इनकार किया है।
IAS आएगा या राज्य प्रशासनिक सेवा का अधिकारी?
अब बड़ा सवाल यही है कि दुर्ग जैसे बड़े नगर निगम की कमान किसे सौंपी जाएगी। यहां IAS अधिकारी की पोस्टिंग होगी या राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को कमिश्नर बनाया जाएगा, यह अभी तय नहीं है।
फिलहाल कमिश्नर की कुर्सी खाली है और करीब 1500 कर्मचारियों की जुलाई की सैलरी अटकी हुई है। अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि सरकार दुर्ग नगर निगम को नया कमिश्नर कब देती है और वेतन भुगतान की व्यवस्था कब तक सामान्य होती है।





