छत्तीसगढ़ सरकार ने भिलाई स्टील प्लांट (BSP) लोहा चोरी मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। राजपत्र में प्रकाशित इस अधिसूचना के बाद अब CBI को पूरे प्रदेश में जांच का अधिकार मिल गया है और वे इस बड़े घोटाले की गहराई से पड़ताल करेंगे।
यह मामला 26 मई 2026 को तब सामने आया जब दुर्ग के पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र के अकलोरडीह और हथखोज इलाके में पुलिस ने कार्रवाई की। जांच में खुलासा हुआ कि भिलाई स्टील प्लांट से करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी किया गया था, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। चोरों ने फ्लाई ऐश के नीचे लोहा छिपाकर उसे बाहर निकाला और रसमड़ा स्थित एक निजी फैक्ट्री में खपाया।

इस मामले में अब तक 21 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तारों में भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारी, स्क्रैप कारोबारी, ट्रांसपोर्टर और रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग व डायरेक्टर शामिल हैं। हालांकि, विनोद कुमार गर्ग को बाद में कोर्ट से जमानत मिल गई है। इसके अलावा CISF के सात जवानों को भी ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया गया है।
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने 20 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मामले में CBI जांच की मांग की थी। मीडिया में इस मामले की खबर दिखाए जाने के बाद CBI जांच की मांग और तेज हो गई थी। अंततः राज्य सरकार ने CISF की सिफारिश के बाद CBI को जांच सौंपने का फैसला लिया।
अब CBI चोरी किए गए स्क्रैप की खरीद-फरोख्त, ढुलाई और कंपनी तक पहुंचाने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करेगी। जांच एजेंसी पूरे सिंडिकेट की कड़ी-दर-कड़ी पड़ताल करेगी और नए खुलासे हो सकते हैं।इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।






