“भारत से दिक्कत है तो लाहौर चले जाओ”— धीरेंद्र शास्त्री

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

चश्मा बेचने वाली कंपनी लेंसकार्ट से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मुद्दे पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कंपनी पर निशाना साधा है।

दरअसल, पूरा मामला कंपनी के एक कथित इंटरनल डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ, जिसमें कर्मचारियों को तिलक लगाने और कलावा पहनने से जुड़ी पाबंदियों का जिक्र सामने आया। जैसे ही यह बात सार्वजनिक हुई, कई संगठनों और लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।

इसी बीच बाबा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को भारत की परंपराओं और धार्मिक प्रतीकों से परेशानी है, तो उसे देश छोड़ देना चाहिए।

उन्होंने अपने बयान में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसी कंपनियों को भारत में काम करने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए, अगर वे यहां की आस्था और संस्कृति का सम्मान नहीं कर सकतीं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग तिलक, कलावा, राम-श्याम या अन्य धार्मिक प्रतीकों से दिक्कत रखते हैं, वे “पतली गली से निकल लें।”

इस विवाद के बाद स्थिति को संभालते हुए लेंसकार्ट ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करती है। नई गाइडलाइन में कर्मचारियों को बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति दे दी गई है।

फिलहाल, मामला शांत होने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस विवाद ने एक बार फिर कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता और कॉर्पोरेट नीतियों के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment