कांग्रेस के ₹81 लाख से द इंडियन एक्सप्रेस की निष्पक्षता पर बहस तेज

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा द इंडियन एक्सप्रेस को कथित तौर पर ₹81.45 लाख का भुगतान किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। यह दावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए किया है। उनके अनुसार, कांग्रेस के चुनावी खर्च से जुड़े रिकॉर्ड में द इंडियन एक्सप्रेस को यह भुगतान दर्ज है।

जेठमलानी ने इस भुगतान को लेकर अखबार की संपादकीय स्वतंत्रता और कांग्रेस के साथ उसके कथित संबंधों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से जुड़ी हालिया खबरों की पृष्ठभूमि में इस वित्तीय लेन-देन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उठते प्रमुख सवाल

  • क्या ₹81.45 लाख का भुगतान राजनीतिक विज्ञापन के लिए था?
  • क्या भुगतान का पूरा विवरण चुनाव आयोग के समक्ष विधिवत दर्ज किया गया?
  • क्या यह रकम केवल विज्ञापन और चुनावी प्रचार से संबंधित थी?
  • क्या द इंडियन एक्सप्रेस ने इस भुगतान के बावजूद अपनी संपादकीय स्वतंत्रता बनाए रखी?
  • क्या कांग्रेस और अखबार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया गया है?

राजनीतिक दलों द्वारा समाचार-पत्रों और मीडिया संस्थानों में विज्ञापन देना सामान्य चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन जब भुगतान और किसी संस्थान की संपादकीय कवरेज के बीच संबंध का आरोप लगाया जाए, तो पारदर्शिता और सार्वजनिक स्पष्टीकरण जरूरी हो जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों में अभी तक इस भुगतान से संपादकीय पक्षपात साबित होने का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।

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