बिलासपुर। जीवनदायिनी कही जाने वाली अंतःसलिला अरपा नदी आज दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ शहर के करीब 70 छोटे-बड़े नालों का गंदा और जहरीला पानी लगातार नदी में मिल रहा है, तो दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में रेत माफिया का बेखौफ अवैध उत्खनन नदी के अस्तित्व पर ही संकट बनकर मंडरा रहा है। हालात ऐसे हैं कि अरपा की स्वच्छ धारा अब कई जगह काले और बदबूदार पानी में बदलती नजर आ रही है।
अरपा नदी को बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़े-बड़े दावे जरूर किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर के कुदुदंड, सरकंडा, सिम्स, जबड़ापारा और पचरीघाट जैसे घनी आबादी वाले इलाकों से निकलने वाला गंदा पानी और सार्वजनिक शौचालयों का मल-मूत्र सीधे नदी में बहाया जा रहा है। नगर निगम की ओर से पहले 252 करोड़ रुपए का एसटीपी प्रोजेक्ट भेजा गया था, लेकिन वह अब तक फाइलों में दबा पड़ा है। वर्तमान में संचालित चार एसटीपी इस भारी प्रदूषण को रोक पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
कोनी क्षेत्र के पास पहुंचते ही अरपा नदी का स्वरूप किसी बड़े नाले जैसा दिखाई देने लगता है। शहर में जहां प्रदूषण ने नदी की हालत बिगाड़ दी है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रेत माफिया ने नदी के किनारों को खोखला करना शुरू कर दिया है। सेंदरी से कछार और कछार से लोफंदी तक अवैध उत्खनन का खेल वर्षों से जारी है।
रेत माफिया ने नदी से महज 30 से 50 मीटर दूर स्थित सरकारी जमीनों को भी नहीं छोड़ा। करीब 10 एकड़ से अधिक सरकारी रकबे पर जेसीबी और भारी मशीनों से 15 से 50 फीट तक गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं। इस अंधाधुंध खुदाई का असर नदी के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और आसपास का पर्यावरण भी तेजी से बर्बाद हो रहा है।
स्कूल की सड़क बदहाल, आदिवासी बस्ती का रास्ता प्रभावित
अवैध उत्खनन में लगी भारी और ओवरलोड गाड़ियां लोफंदी हाई स्कूल के सामने से गुजरती हैं। लगातार आवाजाही से सड़क पूरी तरह कीचड़ और मलबे में तब्दील हो चुकी है। बीते बारिश के मौसम में स्कूली बच्चों को घुटनों तक कीचड़ पार कर स्कूल पहुंचना पड़ा था। यही सड़क स्थानीय धनुहार आदिवासी बस्ती का मुख्य रास्ता भी है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
सरकारी जमीनों पर कब्जे का आरोप
जमीनी जांच में सामने आया है कि लोफंदी गांव के खसरा नंबर 3, 4, 5, 6 और 41, 42, 43 से लगी सरकारी जमीनों पर अवैध उत्खनन कर कब्जा किया जा रहा है। इन जमीनों को बड़े पैमाने पर खोदकर नुकसान पहुंचाया गया है। जिम्मेदार विभागों की चुप्पी के कारण रसूखदार लोगों को खुली छूट मिलती नजर आ रही है, जबकि शासन को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पिकनिक स्पॉट बचाने और हरियाली बढ़ाने की मांग
जिस क्षेत्र में अवैध उत्खनन हो रहा है, वहां से कुछ ही दूरी पर अरपा का सुंदर तट मौजूद है, जहां सालभर लोग पिकनिक मनाने पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि करीब 10 एकड़ जमीन को माफियाओं से मुक्त कराकर संरक्षित किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि यहां गार्डन विकसित किया जाए या बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कराया जाए, तो पर्यावरण संरक्षण के साथ यह क्षेत्र आकर्षण का केंद्र भी बन सकता है।
शौचालयों और नालियों की गंदगी सीधे नदी में
गोड़पारा और सिम्स अस्पताल क्षेत्र से निकलने वाली नालियों का गंदा पानी सीधे अरपा नदी में छोड़ा जा रहा है। घनी आबादी वाले इलाकों का दूषित पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के नदी के मुख्य प्रवाह में मिल रहा है। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण नदी का पानी जहरीला और बदबूदार हो चुका है। इसका असर अब आसपास के भूजल पर भी पड़ने लगा है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।





