मैनपाट के सपनादर में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान को लेकर मंगलवार को आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई भारी तनाव और विवाद में बदल गई। ग्रामीणों ने जनसुनवाई को अवैध बताते हुए जमकर विरोध किया और कहा कि बिना ग्रामसभा की अनुमति के खदान की प्रक्रिया आगे बढ़ाना ‘कानूनी धोखाधड़ी’ है।
ग्रामसभा की मंजूरी के बिना जनसुनवाई का आरोप
जनसुनवाई में पहुंचे अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने साफ कहा कि प्रभावित गांवों की ग्रामसभा बुलाए बिना ही जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश ग्रामीणों को यह तक नहीं पता कि जनसुनवाई किस मुद्दे पर हो रही है।
जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने भी कंपनी पर निर्धारित प्रक्रिया तोड़ने का आरोप लगाते हुए जनसुनवाई को पूर्णतः अवैध करार दिया।
171 हेक्टेयर में उत्खनन की तैयारी, पर स्थानीय नाराज़
सपनादर क्षेत्र में 171 हेक्टेयर जमीन के लिए मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड को लीज मिली है, जिसकी वार्षिक उत्खनन क्षमता एक लाख 27 हजार 800 टन बताई गई है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि मैनपाट में अब तक किसी खदान से उन्हें कोई लाभ नहीं मिला।
उल्टा भारी वाहनों से सड़कों का नुकसान और पर्यावरणीय असर बढ़ता जा रहा है।
कड़ी सुरक्षा के बीच जनसुनवाई, बाहरी लोगों को खदेड़ा
हंगामे की आशंका को देखते हुए एएसपी अमोलक सिंह के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
जनसुनवाई शुरू होने से पहले ही ग्रामीणों ने नारेबाजी शुरू कर दी और प्रक्रिया रद्द करने की मांग की।
स्थिति तब बिगड़ गई जब कुछ बाहरी लोग खनन के समर्थन में बोलने पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा ‘सपोर्ट जुटाने’ के लिए बाहरी लोगों को लाया गया है।
गुस्से में ग्रामीणों ने उन्हें बाहर खदेड़ दिया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
पहले भी कई बार विरोध, ग्रामीण दो टूक—खदान नहीं चाहिए
इससे पहले 30 नवंबर को नर्मदापुर में आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने पंडाल उखाड़ दिया था।
नर्मदापुर की जनसुनवाई में 95% लोगों ने खदान के खिलाफ राय दी थी, लेकिन फिर भी प्रक्रियाएं जारी हैं, जिससे लोगों में और ज्यादा नाराज़गी बढ़ गई है।
मैनपाट के आदिवासी इलाकों में लगातार विरोध जताया जा रहा है और ग्रामीणों का कहना है कि बॉक्साइट उत्खनन उनके पर्यावरण, जमीन और जीवन को नुकसान पहुंचाएगा, इसलिए वे किसी भी कीमत पर नई खदान नहीं खुलने देंगे।







