हाथियों का आतंक चरम पर: दो दिनों में दो लोगों की मौत, खेतों और मकानों को भारी नुकसान

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक बार फिर हाथियों का आतंक ग्रामीण इलाकों में भय और दहशत का माहौल बना रहा है। बीते दो दिनों में हाथियों के हमले में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने लुंड्रा, मैनपाट और उदयपुर क्षेत्रों के लोगों में गहरा डर बैठा दिया है। हाथियों के झुंड ने न केवल लोगों पर हमला किया बल्कि खेतों में लगी फसलों और कई मकानों को भी नुकसान पहुंचाया।

पहली घटना लालमाटी इलाके में हुई, जहां भोपाल से आए एक व्यक्ति की हाथियों के झुंड के हमले में मौत हो गई। वह किसी निजी कार्य से अंबिकापुर आया था और रात में गांव के बाहरी इलाके से गुजरते समय हाथियों की चपेट में आ गया। वहीं दूसरी घटना लुंड्रा वन क्षेत्र में मंगलवार देर शाम की है। जानकारी के अनुसार, एक युवक स्थानीय कार्यक्रम देखकर घर लौट रहा था, तभी रास्ते में हाथियों का दल सामने आ गया। युवक ने भागने की कोशिश की, लेकिन झुंड ने उसे कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इन घटनाओं के बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोग अब अंधेरा होने के बाद घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। हाथियों का झुंड गांवों के करीब आ चुका है, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक करीब 25 हाथियों का दल खेतों और बस्तियों की ओर बढ़ रहा है। इनमें छोटे और बड़े सभी हाथी शामिल हैं, जो भोजन और पानी की तलाश में गांवों के नजदीक आ रहे हैं।

वन विभाग ने पूरे क्षेत्र को संवेदनशील घोषित कर अलर्ट जारी कर दिया है। टीमों द्वारा गांवों में मुनादी कर लोगों को हाथियों से दूर रहने, रात में अकेले खेतों में न जाने और मोबाइल फ्लैश या लाइट का उपयोग न करने की सख्त हिदायत दी गई है। साथ ही मृतकों के परिजनों को मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

लगातार बढ़ रही इन घटनाओं से प्रशासन और ग्रामीण दोनों ही चिंतित हैं। हाथियों की बढ़ती आवाजाही न केवल जान-माल के लिए खतरा बन रही है बल्कि फसलों और मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा रही है। स्थानीय प्रशासन अब हाथियों को आबादी से दूर हटाने के उपायों पर काम कर रहा है, ताकि ग्रामीण इलाकों में शांति और सुरक्षा बहाल की जा सके।

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