दीपावली पर ठेकेदारों में हाहाकार, 25 साल में पहली बार रुके जल जीवन मिशन के भुगतान

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। राज्य गठन के बाद यह पहली बार हुआ है जब दीपावली के समय मिशन के तहत कार्य कर रहे अधिकांश ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार, विभाग के भ्रष्ट और मनमौजी अधिकारियों ने सिर्फ कुछ चुनिंदा बड़े ठेकेदारों के बिल पास किए हैं, जबकि सैकड़ों छोटे ठेकेदारों को अब तक एक रुपये तक का भुगतान नहीं मिला है। इससे मिशन में काम करने वाले ठेकेदारों में जबरदस्त आक्रोश है और कई ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, विभाग में भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह से अफसरों की मर्जी पर निर्भर है। कई जिलों में कार्य समय पर पूरा होने के बावजूद भुगतान रोका गया है। वहीं, जिन एजेंसियों को विभागीय अधिकारियों से करीबी मानी जाती है, उन्हें प्राथमिकता देकर करोड़ों की राशि जारी कर दी गई। इससे विभागीय पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसा लगता है कि इन अधिकारियों का संरक्षण मंत्री के हाथ में है।

ठेकेदारों का कहना है कि पिछले 25 वर्षों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि दीपावली जैसे बड़े त्यौहार पर भुगतान रोक दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया है कि जल जीवन मिशन के कुछ भ्रष्ट अधिकारी मिलीभगत से सिर्फ अपने चहेतों को फायदा पहुँचा रहे हैं। भुगतान न मिलने से कई ठेकेदारों की अन्य परियोजनाएँ भी प्रभावित हो गई हैं।

विभागीय गलियारों में चर्चा है कि एडिशनल MD और वित्त शाखा के कुछ अधिकारियों के बीच सांठगांठ के कारण भुगतान में जानबूझकर देरी की जा रही है। कई फाइलें महीनों से लंबित हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई है। इससे ठेकेदारों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार को ऊपर से संरक्षण मिला हुआ है।

जनता और ठेकेदार संगठनों ने सरकार से मांग की है कि मिशन में हो रही इस वित्तीय अनियमितता की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संकेत होगा कि जल जीवन मिशन अब जनसेवा नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment