बस्तर संभाग में शिक्षकों का आक्रोश अब आंदोलन का रूप लेने जा रहा है। लंबे समय से संयुक्त संचालक शिक्षा की कार्यशैली से असंतुष्ट शिक्षकों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया है। शिक्षकों का आरोप है कि पिछले दो से तीन महीनों से स्कूलों में निरीक्षण के नाम पर संयुक्त संचालक द्वारा लगातार मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। इस दौरान कई शिक्षकों को बिना किसी ठोस कारण के फटकार लगाई गई, निलंबन, वेतन वृद्धि रोकने और अपमानजनक व्यवहार जैसी घटनाएँ लगातार बढ़ती गईं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब बस्तर संभाग के सातों जिलों के शिक्षक एकजुट होकर 7 नवंबर को स्कूल बंद रखेंगे और जगदलपुर में विशाल आक्रोश रैली निकालेंगे। इससे पहले, 3 नवंबर से शिक्षक काली पट्टी बांधकर विरोध की शुरुआत करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान उनकी गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित किए गए, जिससे कई शिक्षक मानसिक रूप से आहत हुए हैं।
इससे पूर्व, 16 अक्टूबर 2025 को बस्तर जिले के सैकड़ों शिक्षकों ने स्वैच्छिक रैली निकालकर संयुक्त संचालक को हटाने की माँग करते हुए आयुक्त बस्तर संभाग एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि तीन दिनों में संयुक्त संचालक को नहीं हटाया गया, तो शिक्षक आंदोलन का रास्ता अपनाएँगे।
हालांकि दीपावली अवकाश के बाद भी शासन स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप, 31 अक्टूबर 2025 को बस्तर संभाग के सभी शैक्षणिक संगठनों की वर्चुअल बैठक बुलाई गई, जिसमें सर्वसम्मति से आंदोलन को तेज करने और 7 नवंबर को सभी स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया।
शिक्षकों का कहना है कि वे सम्मानजनक व्यवहार और पारदर्शी प्रशासनिक नीति की माँग कर रहे हैं। उनका दावा है कि शिक्षकों के योगदान को मान्यता देने के बजाय उन्हें डर और अपमान का माहौल झेलना पड़ रहा है। अब यह विरोध सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षकों की गरिमा और स्वाभिमान की रक्षा के लिए एक बड़ा संघर्ष बन चुका है।







