रायपुर के रहने वाले महेंद्र गोयनका को कोलकाता पुलिस ने करीब 1000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में बीती रात गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने 18 जुलाई की देर रात यह कार्रवाई की और गिरफ्तारी के बाद उन्हें अपने साथ कोलकाता ले गई।
बताया जा रहा है कि महेंद्र गोयनका पहले मध्य प्रदेश के विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में एक अहम प्रबंधकीय पद पर काम कर चुके हैं। आरोप है कि मामला सैकड़ों करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ियों और कंपनी के बिके हुए माल को कथित तौर पर धोखाधड़ी से बेचने से जुड़ा है।
आरोपों के मुताबिक, महेंद्र गोयनका ने फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर पाठक परिवार की कई कंपनियों पर नियंत्रण हासिल कर लिया था। इस मामले में कोलकाता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी, 467, 468, 471 समेत अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी एफआईआर के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई है।
महेंद्र गोयनका की गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश के कई अधिकारियों और कारोबारियों से जुड़े कुछ बड़े खुलासे होने की भी चर्चा है। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई आईएएस अधिकारियों के कथित काले धन को सफेद करने का काम भी महेंद्र गोयनका के जरिए किया जाता था।
बताया जा रहा है कि मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के 9 मई 2025 के आदेश में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका के खिलाफ कथित वित्तीय गबन से जुड़ी टिप्पणियां भी दर्ज हैं।
इसके अलावा, उनकी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात में भी कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के हेरफेर की खबरें सामने आई हैं।





