रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने बेटे चैतन्य बघेल से ED दफ्तर में मुलाकात की। शराब घोटाले के आरोप में गिरफ्तार चैतन्य से मिलने उनके साथ बेटी और बहू भी मौजूद रहीं। मुलाकात के बाद भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “सरकार डराकर, धमकाकर और बदनाम कर विपक्ष की आवाज़ को कुचलना चाहती है।”
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की गिरफ्तारी अडाणी समूह के खिलाफ आवाज उठाने का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और आदिवासी ज़मीनों के शोषण के विरोध में कांग्रेस विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाने जा रही थी, उसी से पहले चैतन्य की गिरफ्तारी कर दी गई।
“दादा जिंदा होते तो गर्व करते”
बघेल ने बेटे से मुलाकात के बाद कहा, “अगर तुम्हारे दादा आज जिंदा होते तो बहुत खुश होते। उन्होंने भी अन्याय के खिलाफ कई बार जेल झेली थी। अब तुम भी इस लड़ाई का हिस्सा हो।”

पूरे मामले में कांग्रेस एकजुट
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही सबसे पहला फोन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का आया। बघेल ने कहा कि वह दिल्ली रवाना हो रहे हैं और 22 जुलाई को कांग्रेस का प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा।
शराब घोटाले के आरोप पर भूपेश का पलटवार
बघेल ने कहा कि पप्पू बंसल के बयान के आधार पर चैतन्य को गिरफ्तार किया गया, न कोई नोटिस मिला, न कोई समन। ED के अधिकारी सीधे घर आए और गिरफ़्तार कर ले गए। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।

22 जुलाई को चक्काजाम, हाईवे पर विरोध
कांग्रेस ने 22 जुलाई को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक पूरे राज्य में चक्काजाम की घोषणा की है। सभी जिलों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अडाणी समूह की रक्षा के लिए सरकार जंगल, जमीन और जल का दोहन कर रही है, और विरोध करने वालों को ED का डर दिखाया जा रहा है।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला
ED की रिपोर्ट के मुताबिक यह घोटाला 2,174 करोड़ रुपए का है, जिसमें कई वरिष्ठ अफसर और कारोबारी शामिल हैं। ED का दावा है कि IAS अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर और अन्य ने मिलकर एक सिंडिकेट चलाया, जिससे नेताओं, मंत्रियों, डिस्टलर्स और अफसरों को करोड़ों की अवैध कमाई हुई।
| घोटाले में हिस्सेदारी | राशि |
|---|---|
| नेता-मंत्री | ₹1,392.45 करोड़ |
| शराब निर्माता (डिस्टलर्स) | ₹358.65 करोड़ |
| अनवर ढेबर व टुटेजा | ₹181.52 करोड़ |
| आबकारी विभाग | ₹90.76 करोड़ |
| ज़िला अफसर व कर्मचारी | ₹90.76 करोड़ |
| अन्य कारोबारी | ₹60.50 करोड़ |



