राहुल गांधी ने इथेनॉल नीति को बताया जनविरोधी: कहा—गाड़ियों का माइलेज घटा, जनता की जेब पर डाका

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की इथेनॉल सम्मिश्रण (Ethanol Blending Policy) नीति को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि बिना पूर्व तैयारी और उपभोक्ता सुरक्षा के लागू की गई इस नीति ने देश के करोड़ों वाहन चालकों और मध्यम वर्ग की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
राहुल गांधी के प्रमुख आरोप

  • माइलेज में गिरावट और महंगा सफर:राहुल गांधी ने कहा कि पेट्रोल में 20% तक इथेनॉल (E20) मिलाए जाने से गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है। आम जनता को अब वही दूरी तय करने के लिए ज्यादा पेट्रोल भरवाना पड़ रहा है, जो एक तरह से छिपा हुआ टैक्स है।
  • पुराने वाहनों के इंजनों को खतरा:उन्होंने दावा किया कि देश की सड़कों पर दौड़ रहे करोड़ों पुराने वाहन (Non-E20 Compliant) इस ईंधन के लिए तैयार नहीं हैं। इससे इंजन खराब हो रहे हैं और लोगों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ रहा है।
  • किसान बनाम कॉर्पोरेट का मुद्दा: राहुल गांधी ने कहा कि नीति का फायदा आम गन्ना किसानों को मिलने के बजाय कुछ चुनिंदा बड़े उद्योगपतियों और डिस्टिलरी मालिकों को दिया जा रहा है।

राजनीतिक मायने और चुनावी गणित

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी द्वारा इथेनॉल के मुद्दे को उठाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है:

पहलूप्रभाव और रणनीति
मध्यम वर्ग से जुड़ावबाइक, स्कूटर और कार चलाने वाले हर व्यक्ति की जेब पर इसका सीधा असर पड़ता है, जो एक बड़ा वोटर बेस है।
किसान वोट बैंकचीनी बेल्ट (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक) में किसानों की बकाया राशि और नीतिगत अनिश्चितता को मुद्दा बनाना।
भाजपा की प्रतिक्रियाभाजपा नेताओं का कहना है कि इथेनॉल नीति से देश के अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बच रही है और प्रदूषण कम हो रहा है।

जनता के बीच सुगबुगाहट

देशभर में सोशल मीडिया से लेकर चाय की चौपालों तक इथेनॉल युक्त पेट्रोल से माइलेज कम होने की चर्चाएँ तेज़ हैं। राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाए जाने के बाद, माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में इथेनॉल नीति एक बड़ा चुनावी मुद्दा रूप ले सकती है।

🔗जुड़े हमारे व्हाट्सएप ग्रुप में

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment