“कच्चे घर में बिताया वक़्त भूले नहीं राहुल—अब मांझी के परिवार को दे रहे हैं पक्का सम्मान।”
बिहार के ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी ने जिस तरह पहाड़ काटकर रास्ता बनाया, वो पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। उनके संघर्ष और त्याग को याद रखना सिर्फ कर्तव्य नहीं, सम्मान की बात भी है।
जब राहुल गांधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ या ‘न्याय यात्रा’ पर निकले, उन्होंने कई बार आम लोगों के घरों में रुककर उनका दुख-दर्द साझा किया।

गया में दशरथ मांझी के घर जाना भी इसी भावना का हिस्सा था। राहुल गांधी ने मांझी के कच्चे घर में खाना खाया, परिवार से बात की, और वादा किया कि इस संघर्षशील परिवार को समाज में वह इज़्ज़त और सहारा मिलेगा, जिसके वे हक़दार हैं।

अब राहुल गांधी ने दशरथ मांझी के परिवार के लिए पक्का मकान, नौकरी और अन्य सहायता का ऐलान कर मिसाल पेश की है।
ये केवल वादों की राजनीति नहीं, इंसानियत की सियासत है। जब नेता जनता के संघर्ष को अपना मानें, तब ही बदलाव आता है। दशरथ मांझी का रास्ता अब सिर्फ पहाड़ नहीं काटता, दिलों को जोड़ता है।
राहुल का ये कदम एक संदेश है— संघर्ष को सम्मान दो, इतिहास खुद गवाही देगा।







