रायपुर।छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में आयोजित मासिक मूल्यांकन परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को बांटे गए परीक्षा पत्रों पर अदानी फाउंडेशन का नाम और लोगो प्रमुखता से छपा हुआ पाया गया है।
शैक्षणिक सामग्री को निजी कॉरपोरेट घराने के प्रचार का जरिया बनाए जाने पर जहां शिक्षक संगठनों और समाजसेवियों में आक्रोश है, वहीं विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लिया है।
क्या है पूरा मामला?
अगस्त माह के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित मासिक आकलन टेस्ट के दौरान राज्य के कई जिलों में विद्यार्थियों को जो प्रश्नपत्र दिए गए, उनके सबसे ऊपरी हिस्से में सरकारी मोनोग्राम के साथ ‘अदानी फाउंडेशन’ का लोगो प्रिंट था। परीक्षा हॉल में उत्तर हल कर रहे छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में पहुंचे इन विज्ञापनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया।

विरोध के मुख्य बिंदु
शिक्षा का व्यावसायीकरण: आलोचकों का कहना है कि परीक्षा जैसे निष्पक्ष और पवित्र माध्यम को किसी व्यावसायिक घराने की ब्रांडिंग के लिए इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित है।
सरकारी संसाधनों पर सवाल:शिक्षकों का सवाल है कि क्या राज्य सरकार के पास प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग जैसे बुनियादी काम के लिए भी बजट खत्म हो गया है जो निजी कंपनियों की स्पॉन्सरशिप लेनी पड़ रही है।
बच्चों के मन पर प्रभाव:विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकारी और शैक्षणिक मंचों से किसी खास निजी ब्रांड का इस तरह प्रचार करना नैतिक रूप से गलत है।
प्रशासन और विभाग का रुख
विवाद बढ़ता देख विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर यह कहा जा रहा है कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के तहत निजी कंपनियां अक्सर शैक्षणिक गतिविधियों और संसाधनों में सहयोग करती हैं। लेकिन प्रश्नपत्रों पर लोगो कैसे प्रिंट हुआ और क्या इसके लिए कोई नियमावली तय की गई थी, इस पर कोई स्पष्ट जवाब देने से जिम्मेदार अधिकारी बचते नजर आ रहे हैं।






