हजारों बुजुर्ग जंतर-मंतर पर जुटे, सरकार से ₹7,500 पेंशन की मांग

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली।देशभर से आए EPS-95 पेंशनरों ने अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया। कड़ी धूप और बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनर EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) के बैनर तले जुटे और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

पेंशनरों का कहना है कि वर्ष 2014 में भाजपा ने सत्ता में आने से पहले पेंशन बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन 12 साल बीत जाने के बाद भी न्यूनतम पेंशन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।

₹7,500 न्यूनतम पेंशन और मुफ्त इलाज की मांग

संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये की जाए। इसके साथ महंगाई भत्ता (DA) और मुफ्त चिकित्सा सुविधा भी दी जाए।

समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने कहा कि अगर सरकार जल्द फैसला नहीं करती है तो देशभर में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। इसके बाद ‘जेल भरो आंदोलन’ भी शुरू किया जाएगा। वहीं कुछ श्रमिक नेताओं ने संसद के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और आत्मदाह तक की चेतावनी दी है।

2014 के वादे का किया जिक्र

संघर्ष समिति की बंगाल इकाई के अध्यक्ष तपन दत्ता ने कहा कि 14 जनवरी 2014 को भाजपा ने 1,000 रुपये की पेंशन को नाकाफी बताते हुए इसे कम से कम 3,000 रुपये करने की मांग की थी। लेकिन सरकार बनने के बाद सितंबर 2014 में न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये तय कर दी गई और तब से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।

पेंशनरों का कहना है कि 30 से 40 साल तक नौकरी करने के बाद भी कई लोगों को आज सिर्फ 500 से 700 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है। ऐसे में कई बुजुर्गों को इस उम्र में भी रिक्शा चलाने और मजदूरी जैसे काम करने पड़ रहे हैं।

सरकार ने वित्तीय स्थिति का दिया हवाला

सरकार और EPFO का कहना है कि पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति को देखते हुए फैसला लेना होगा। हाल ही में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री ने संसद में बताया था कि EPS-95 की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने को लेकर कई ज्ञापन मिले हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

मार्च 2023 में श्रम मंत्रालय ने भी कहा था कि भगत सिंह कोश्यारी समिति की सिफारिशों को प्रशासनिक और वित्तीय व्यवहार्यता के अनुसार ही लागू किया गया है।

81 लाख पेंशनभोगियों की उम्मीदें

EPS-95 योजना नवंबर 1995 में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के अलावा चाय बागान, जूट मिल, बीड़ी और चीनी मिलों के श्रमिक भी शामिल हैं।

पेंशनरों का कहना है कि वे प्रधानमंत्री से दो बार मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। अब बढ़ती उम्र और खराब होती सेहत के बीच वे अपनी मांगों के जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

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