लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों के प्रधानमंत्री आवास के बाहर चार घंटे तक चले धरने के बाद आखिरकार केंद्र सरकार को झुकना पड़ा। मंगलवार को भारी संख्या में पार्टी के सांसदों, नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर करीब चार-पांच घंटे तक धरना चला। इसके बाद पुलिस ने जबरन राहुल और प्रियंका गांधी को वहां से हटा दिया।
सरकार की रणनीति पर विपक्ष का भारी पड़ा
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा राहुल गांधी से मिलकर बातचीत के बाद जब धरना समाप्त नहीं हुआ, तो पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, और कई अन्य नेताओं को ‘बलपूर्वक’ हिरासत में लिया और उन्हें बस में बैठाकर ले गई। पुलिस द्वारा उठाए जाने के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जोरदार प्रतिरोध भी किया।
सरकार ने शुरू में इस प्रदर्शन को ‘सुरक्षा से खिलवाड़’ और ‘खतरनाक परंपरा’ बताकर खारिज करने की कोशिश की। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करके बहुत गलत और खतरनाक परंपरा की शुरुआत की है। लेकिन विपक्ष के दबाव के आगे सरकार को बातचीत के लिए तैयार होना पड़ा।
कांग्रेस की 6 मांगें: सरकार के सामने अल्टीमेटम
कांग्रेस ने पीएम आवास के बाहर भारी विरोध और धरना प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार से छह प्रमुख मांगें रखीं:
• केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने
• संसद के मानसून सत्र के दौरान NEET के मुद्दे पर चर्चा करने
• केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली पुलिस की तरफ से की गई लाठीचार्ज की कार्रवाई पर सदन में बयान देने
• दिल्ली पुलिस की लाठीचार्ज की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने
• घायलों की उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने
• छात्रों को मुआवजा देने की मांग की है।
छात्रों पर हमला हर परिवार पर हमला
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है। प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे, तो वो नहीं कर पाएंगे। लोकसभा में नेता विपक्ष के तौर पर राहुल गांधी ने दो साल पूरे करने पर कहा था कि उनका उद्देश्य हर भारतीय की आवाज को सत्ता तक पहुंचाना है।
लोकतंत्र की आह: मोदी सरकार का खामोशी का खेल टूटा
कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार तानाशाही तरीके से चल रही है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है। लेकिन सड़क पर उतरकर विपक्ष ने सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई, और उत्तेजना बढ़ती जा रही है। नीट पेपर लीक पर काकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद विपक्ष के सड़क पर उतरने से सरकार की मुश्किल बढ़ गई।
सीजेपी के बाद विपक्ष के सड़क पर उतरने से मुश्किल बढ़ी और आखिरकार सरकार को विपक्ष से चर्चा के लिए तैयार होना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार विपक्ष से चर्चा के लिए तैयार हुई।
संसद में चर्चा की संभावना
खबर में यह भी लिखा है कि संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की संभावना जताई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक देश का गंभीर मुद्दा है और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्रों का हित सर्वोपरि है और सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है।
जनआंदोलन की जीत
आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। विपक्ष के दबाव, छात्रों के आंदोलन और जनता के गुस्से के आगे मोदी सरकार को बातचीत के लिए तैयार होना पड़ा। यह लोकतंत्र की जीत है, जहां आवाज उठाने वालों को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने कहा था कि NEET के छात्रों की लड़ाई हो, वोट चोरी का पर्दाफाश हो या संविधान की रक्षा, हर मोर्चे पर वे लोगों के साथ खड़े रहे हैं।





