हसदेव अरण्य क्षेत्र में केंते एक्सटेंशन और तारा कोयला खदान को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। दोनों कोयला ब्लॉकों को जल्द शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। केंते एक्सटेंशन को अंतिम वन स्वीकृति देने और तारा कोयला ब्लॉक आवंटित करने की तैयारी किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार दोनों कोयला ब्लॉकों का कुल क्षेत्रफल करीब 8,500 एकड़ है। इसका लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ के सबसे समृद्ध वन क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में खनन शुरू होने पर बड़े पैमाने पर जंगल और जैव विविधता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

रिजेक्ट कोयले के नाम पर भी सवाल
हसदेव में पहले से संचालित PEKB और परसा कोयला खदानों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि रिजेक्ट कोयले के नाम पर बड़ी मात्रा में कोयला अडानी समूह के रायपुर और मध्यप्रदेश स्थित पावर प्लांटों में खपाया जा रहा है।
MDO मॉडल पर भी उठे सवाल
हसदेव में माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर (MDO) मॉडल के जरिए कोयला खनन को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि इस व्यवस्था के जरिए बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताओं को अंजाम दिया जा रहा है और इसे वे लाखों करोड़ रुपये के कथित कोयला घोटाले से जोड़ रहे हैं।
‘असली कोयला घोटाला अब हो रहा है’
हसदेव के मुद्दे को लेकर सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया गया है कि कोयला घोटाले का असली दौर यूपीए सरकार के समय नहीं, बल्कि मोदी सरकार के कार्यकाल में चल रहा है और इसके लिए हसदेव के जंगलों को निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि, कोयला घोटाले, अवैध रूप से कोयला खपाने और आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। केंते एक्सटेंशन और तारा ब्लॉक की वन स्वीकृति, आवंटन तथा खनन प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।





