इस दिन कुरे पत्ता में नया धान का चूड़ा , दूध, गुड़, घी के मिश्रण से बना प्रसाद अर्पण और ग्रहण करने के पाश्चात विभिन्न प्रकार के पारम्परिक व्यंजन खीर, अड़सा पीठा, मूँग , चना , आदि तैयार कर परिवार और समुदाय एक साथ भोजन करते हैं जिसे ”नवाखाई भोग” कहा जाता है ।
प्रसाद ग्रहण करने के पश्चात, धोती कुर्ता, नव वस्त्र धारण बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है और पुराने मतभेदों को भुलाकर नए रिश्ते बनाए जाते हैं ।
घर प्रमुख सदस्य पुरुष-महिलाएँ नुआखाई पर्व के एक दिन पूर्व का उपवास रखकर देवी देवताओं को आह्वान करते है और पूजा अर्चना करते हैं।
नुआखाई शब्द दो शब्दों ”नुआ” (नया) और ”खाई” (खाना) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है ”नए अन्न का स्वागत”। यह पर्व भाद्रपद माह की शुक्ल पंचमी (ऋषि पंचमी) को मनाया जाता है, जो गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद आता है । इस दिन नया धान और नवान्न सबसे पहले अपने अपने ईष्ट देवी-देवताओं को अर्पित करते हैं और फिर परिवार के साथ उसका भोग लगाते हैं ।
इस पर्व की महत्वपूर्णता
नुआखाई की परंपरा वैदिक काल से जुड़ी हुई है, जहाँ इसे प्रलम्बन यज्ञ (नई फसल की कटाई का अनुष्ठान) के रूप में मनाया जाता था। आज यह पर्व ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य क्षेत्रों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
छत्तीसगढ़ में नवाखाई का महत्व
भारत एक कृषि प्रधान देश है तथा छत्तीसगढ़, जिसे *”धान का कटोरा”* कहा जाता है । भारतीय संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से 51 तक में राज्य नीति निदेशक तत्व में एक आदर्श राज्य की स्थापना के लिए दिशा निर्देश उल्लेखित है जिसके अनुच्छेद 48 में कृषि और पशुपालन संगठन की परिभाषा दी गयी है। नुआखाई जैसे पर्व को बढ़ावा देना संविधान की भावना के अनुरूप है। लाखों की आबादी वाला छत्तीसगढ़ उत्कल समाज का एक बड़ा भाग भले ही आज मेहनत, मज़दूरी और संघर्ष कर अपना जीवन यापन करता है पर अपने पूर्वजों के द्वारा दी गयी भारतीय संस्कृति की धरोहर नुआखाई पर्व को वह धूमधाम से मनाते है है। नुआखाई विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, राजनंदगाँव, बिलासपुर, गरियाबंद, महासमुन्द, रायगढ़, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा, धमतरी और बस्तर के क्षेत्रों में उत्साह से मनाया जाता है । यहाँ इसे नुआखाई , ”नवाखाई” और नवापानी आदि नाम से भी जाना जाता है, । छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस पर्व को स्थानीय अवकाश दिए जाने से स्थानीय समुदायों को अपनी परंपराओं को पूर्ण उत्साह के साथ मनाने का अवसर मिला है ।



