कोरबा।जिला भाजपा के नए कार्यालय ‘अटल स्मृति भवन’ के भूमिपूजन और शिलान्यास का आयोजन सोमवार, 2 फरवरी को संपन्न तो हुआ, लेकिन यह कार्यक्रम संगठन की मजबूती से ज़्यादा असहज सवालों और अंदरूनी खींचतान के लिए चर्चा में रहा। मंच से इसे ऐतिहासिक और सफल बताया गया, मगर ज़मीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी कहती दिखी।
मुख्यमंत्री आए, पर भीड़ नहीं जुटी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी के बावजूद आयोजन स्थल पर सैकड़ों कुर्सियां खाली रहीं। पार्टी से जुड़े लोगों के मुताबिक, आसपास के इलाकों से स्कूली बसों और अन्य वाहनों के ज़रिये करीब 2 से ढाई हजार कार्यकर्ताओं को लाया गया, फिर भी पूरा पंडाल नहीं भर सका।
इस दौरान स्कूल बसों के अधिग्रहण के कारण कई छात्रों के स्कूल न पहुंच पाने की बात भी सामने आई, जिसको लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराज़गी देखी गई।
ननकीराम कंवर की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र
कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर की अनुपस्थिति ने पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को खटक दिया। उनके साथ जिले के कई पूर्व जिलाध्यक्ष और संगठन के पुराने कर्णधार भी नज़र नहीं आए।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई वरिष्ठ नेताओं को न तो औपचारिक आमंत्रण मिला और न ही मंच पर कोई सम्मान।
जिसने ज़मीन दी, उसे मंच नहीं मिला
भाजपा के इतिहास से जुड़े लोग याद दिलाते हैं कि 90 के दशक में कोरबा में जिला भाजपा कार्यालय की नींव रखने में ननकीराम कंवर की अहम भूमिका रही।
2009 में कार्यालय विस्तार के लिए उन्होंने अपनी निजी जमीन खरीदकर पार्टी को दान में दी, जिसका शिलालेख आज भी परिसर में मौजूद है। ऐसे नेता का शिलान्यास कार्यक्रम से बाहर रहना, संगठन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
अटल जी के नाम पर भवन, पर आत्मीयता कहां?
मंच से कहा गया कि ‘अटल स्मृति भवन’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों, संस्कारों और राष्ट्र प्रथम की भावना को आगे बढ़ाने का केंद्र बनेगा।
लेकिन संगठन के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं कि दो लाख सदस्यता का दावा करने वाली भाजपा, इस अहम आयोजन में ढाई हजार कार्यकर्ता भी क्यों नहीं जुटा पाई?

कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन में अब संवेदना और संवाद की जगह दिखावा हावी होता जा रहा है।
पोस्टर में तस्वीर को लेकर सत्ता बनाम संगठन
आयोजन की प्रचार सामग्री ने भी अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया। शुरुआत में प्रोटोकॉल के नाम पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों की तस्वीरें प्रमुख रखी गईं, जबकि जिला अध्यक्षों की तस्वीरें अपेक्षाकृत छोटी थीं।
जिला संगठन से जुड़े प्रचारक के विरोध के बाद आनन-फानन में नए फोटो खिंचवाकर पोस्टर दोबारा छापे गए, जिनमें जिला अध्यक्षों की तस्वीरें मुख्यमंत्री के बराबर आकार में रखी गईं। संगठन का तर्क था कि यह आयोजन पार्टी संगठन का है और खर्च भी संगठन उठा रहा है।
मंच संचालन पर भी असहजता
कार्यक्रम के मंच संचालन की जिम्मेदारी जिला मंत्रियों की बजाय पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. राजीव सिंह को दिए जाने को लेकर भी भीतरखाने चर्चाएं रहीं। कई कार्यकर्ताओं ने इसे लेकर असहजता और नाराज़गी जताई।



