राजधानी रायपुर के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में इन दिनों सबसे बुनियादी चीज़ सीरिंज (Syringe) की भारी कमी देखने को मिल रही है। डॉक्टर मरीजों को इंजेक्शन तो लिख देते हैं, लेकिन जब लगाने की बारी आती है तो स्टाफ कह देता है – “सीरिंज बाहर से खरीदकर लाइए।”
16 यूपीएचसी, 4 सीएचसी और 55 हमर अस्पताल-क्लीनिक प्रभावित
रायपुर शहर में 16 यूपीएचसी, 4 सीएचसी, 4 हमर अस्पताल और 50 से अधिक हमर क्लीनिक संचालित हैं। इनमें से अधिकतर केंद्रों पर मरीजों को खुद बाहर से सिरिंज खरीदनी पड़ रही है। इससे मुफ्त इलाज की सुविधा का उद्देश्य ही अधूरा हो रहा है।
मरीजों की परेशानी:
- मठपुरैना स्वास्थ्य केंद्र: संतोषी नगर की जुबैदा बानो को दर्द का इंजेक्शन लगवाना था। नर्स ने कहा – “सिरिंज हमारे पास नहीं है।” मजबूरन उन्हें 1 किमी दूर मेडिकल स्टोर जाना पड़ा।
- पचपेड़ी नाका स्वास्थ्य केंद्र: कुत्ते के काटने पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लिख दिया गया, लेकिन स्टाफ ने साफ कहा कि सिरिंज खरीदकर लानी होगी।
- रामनगर और देवेंद्र नगर हमर क्लीनिक: यहां भी सीरिंज खत्म होने की वजह से मरीजों को बाहर से लाना पड़ रहा है।
अधिकारियों का कहना
सीएमएचओ मिथलेश चौधरी ने बताया – “सीजीएमएससी से सीरिंज की डिमांड भेज दी गई है, जल्द सप्लाई मिलने की उम्मीद है। जिन केंद्रों पर सीरिंज उपलब्ध नहीं है, वहां से मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।”
गंभीर खतरा और सवाल
सरकारी गाइडलाइन के अनुसार अस्पतालों में दवा और जरूरी सामग्री निशुल्क मिलनी चाहिए। लेकिन इंजेक्शन जैसी जरूरी सेवा भी अब मरीजों की जेब पर बोझ डाल रही है। सीरिंज की कमी न सिर्फ इलाज में देरी कर रही है, बल्कि संक्रमण और जानलेवा स्थितियों का खतरा भी बढ़ा रही है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
डबल इंजन सरकार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली साफ झलक रही है। कभी गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस नहीं मिलती, कभी सीटी स्कैन मशीनें खराब पड़ी रहती हैं। अब तो सीरिंज जैसी बेसिक चीज़ की सप्लाई भी ठप है। सवाल यह है कि अगर राजधानी रायपुर में ऐसी स्थिति है, तो ग्रामीण इलाकों में हालात कितने खराब होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।







