पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन जब इसी स्तंभ की आवाज को दबाने की कोशिश होती है, तो पूरा समाज सवालों के घेरे में आ जाता है। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सामने आया है, जहां स्वतंत्र पत्रकार मुकेश चंद्राकर की सनसनीखेज हत्या ने सबको झकझोर दिया है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है।
इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुधवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) के पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया। इनमें दो रिटायर्ड कार्यपालन अभियंता (EE), एक वर्तमान EE, एक SDO और एक सब-इंजीनियर शामिल हैं। सभी आरोपियों को दो दिन की न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है और उनसे पूछताछ जारी है। इन गिरफ्तारियों ने यह संकेत दिया है कि इस हत्या के पीछे गहरी साजिश छिपी हो सकती है।
पुलिस जांच में शक जताया जा रहा है कि हत्या के पीछे ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों का गठजोड़ हो सकता है। बताया जा रहा है कि मुकेश चंद्राकर लगातार क्षेत्र में हो रहे भ्रष्टाचार और निर्माण कार्यों की अनियमितताओं को उजागर कर रहे थे। यही वजह हो सकती है कि भ्रष्ट तंत्र को उनकी सक्रियता से खतरा महसूस हुआ और उन्होंने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची।
मुकेश चंद्राकर एक निर्भीक पत्रकार थे जो बीजापुर जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में भी पूरी निडरता से जनहित के मुद्दे उठाते थे। उनकी हत्या न केवल पत्रकारिता के लिए, बल्कि लोकतांत्रिक समाज के लिए भी एक बहुत बड़ा धक्का है।



