RERA का बड़ा एक्शन: अविनाश, वॉलफोर्ट समेत 595 बिल्डरों को नोटिस

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने प्रदेश के 595 बिल्डरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। रेरा ने पूछा है कि प्रोजेक्ट पूरा होने और सभी आवश्यक प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी कॉलोनी और अपार्टमेंट का प्रबंधन रहवासियों की समितियों को क्यों नहीं सौंपा गया। नोटिस पाने वालों में अविनाश ग्रुप, वॉलफोर्ट, सिंघानिया बिल्डकॉन समेत कई बड़े बिल्डर शामिल हैं।

989 प्रोजेक्ट जांच के दायरे में

रेरा के रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेशभर में 595 बिल्डरों के कुल 989 प्रोजेक्ट इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं। इनमें रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, कोरबा सहित कई जिलों की आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शामिल हैं।

निगम से प्रमाणपत्र लिया, रहवासियों को नहीं सौंपा प्रबंधन

रेरा की जांच में सामने आया कि कई बिल्डरों ने नगर निगम से कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (Completion Certificate) प्राप्त कर लिया है। इसके बावजूद उन्होंने कॉलोनी या अपार्टमेंट का संचालन और आवश्यक दस्तावेज रहवासियों द्वारा गठित समितियों को नहीं सौंपे हैं।

बड़े बिल्डरों पर भी कार्रवाई

नोटिस पाने वाले प्रमुख बिल्डरों में अविनाश ग्रुप, वॉलफोर्ट, सिंघानिया बिल्डकॉन, श्री बिल्डकॉन, श्रीकृष्णा वाटिका महादेव घाट, सुमीत इंफ्रा, श्री विश्व भारती, पारस बिल्डकॉन, संसार बिल्डकॉन, संकल्प बिल्डकॉन, साईंनाथ बिल्डकॉन, नीलम होम्स और दीपक रहेजा शामिल हैं। रायपुर के अलावा भिलाई और दुर्ग के कई बिल्डर भी रेरा की निगरानी में हैं।

हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम को भी नोटिस

इस मामले में रेरा ने केवल बिल्डरों को ही नहीं बल्कि हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम को भी नोटिस जारी किया है। इन संस्थाओं से यह पूछा गया है कि प्रमाणपत्र जारी होने के बाद भी प्रबंधन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई।

क्या कहता है RERA कानून?

RERA अधिनियम की धारा 11(4)(ई) और धारा 17 के अनुसार किसी भी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बिल्डर को सामान्य सुविधाएं, कॉमन एरिया और सभी जरूरी दस्तावेज रहवासियों की समिति या एसोसिएशन को सौंपना अनिवार्य है।

प्रबंधन हस्तांतरण की प्रक्रिया

चरणसमय सीमाबिल्डर की जिम्मेदारी
रहवासी समिति (RWA) का गठनअधिकांश या 50% से अधिक फ्लैट बिकने के 3 माह के भीतरखरीदारों का संगठन बनवाना
कॉमन एरिया का स्वामित्व हस्तांतरणऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिलने के 3 माह के भीतरपार्क, लिफ्ट, सीढ़ियां आदि का अधिकार समिति को देना
दस्तावेज और प्रबंधन सौंपनाकम्प्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के 30 दिन के भीतरसभी रिकॉर्ड और वास्तविक प्रबंधन समिति को सौंपना

रहवासियों की भी जिम्मेदारी

रेरा ने स्पष्ट किया है कि कानून की धारा 19(9) के तहत फ्लैट या प्लॉट खरीदारों की भी जिम्मेदारी है कि वे रहवासी समिति या एसोसिएशन के गठन में सक्रिय भागीदारी करें। यदि खरीदार संगठित नहीं होंगे तो बिल्डरों द्वारा प्रबंधन अपने पास बनाए रखने की स्थिति बनी रह सकती है।

कम्प्लीशन सर्टिफिकेट के बाद क्या होता है?

कानून के अनुसार नगर निगम से कम्प्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद कॉलोनी के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी रहवासी समिति को सौंप दी जानी चाहिए। इसके बाद बिल्डर को प्रबंधन अपने पास रखने का अधिकार नहीं रहता। लेकिन रेरा की जांच में कई मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं पाई गई।

बिल्डर को कौन-कौन से दस्तावेज सौंपने होते हैं?

प्रबंधन हस्तांतरण के दौरान बिल्डर को निम्न दस्तावेज देना अनिवार्य होता है—

  • कम्प्लीशन सर्टिफिकेट
  • ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट
  • फायर, बिजली और पानी विभाग की एनओसी
  • स्वीकृत भवन नक्शा
  • इलेक्ट्रिकल और सीवेज लेआउट
  • लिफ्ट और सुरक्षा संबंधी मैन्युअल
  • मेंटेनेंस और कॉर्पस फंड का पूरा हिसाब
  • वेंडर एवं एएमसी अनुबंध
  • प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े रिकॉर्ड

आखिर बिल्डर प्रबंधन क्यों नहीं सौंपते?

विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों में बिल्डर प्रबंधन अपने पास बनाए रखते हैं, जिससे वे रहवासियों से मेंटेनेंस शुल्क की वसूली जारी रख सकें। यदि रहवासी समिति को अधिकार मिल जाए तो रखरखाव और खर्चों का नियंत्रण सीधे निवासियों के हाथ में आ जाता है। इसी वजह से कई परियोजनाओं में प्रबंधन हस्तांतरण की प्रक्रिया लंबे समय तक लंबित रहती है।

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