मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव एक बार फिर जमीन खरीद और भूमि आवंटन को लेकर राजनीतिक विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया और विपक्ष की ओर से उन पर हितों के टकराव (Conflict of Interest) का आरोप लगाया जा रहा है।
आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव और उनके परिवार ने करीब 168 एकड़ जमीन खरीदी, जिसमें से 111 एकड़ जमीन उस क्षेत्र में है जहां भविष्य में सिंहस्थ कुंभ से जुड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि मुख्यमंत्री होने के कारण उन्हें विकास योजनाओं की अग्रिम जानकारी मिली, जिसका फायदा उठाकर जमीन खरीदी गई।
इसके अलावा दावा किया जा रहा है कि उज्जैन के 2035 मास्टर प्लान वाले क्षेत्र में जमीन खरीदने के बाद भूमि उपयोग (Land Use) में बदलाव किया गया, जिससे जमीन की कीमत बढ़ गई।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन एक ट्रस्ट को मात्र 1 रुपये में आवंटित की गई। आरोपों के अनुसार, इस ट्रस्ट से जुड़े व्यक्ति मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार बताए जा रहे हैं।
इन आरोपों को लेकर विपक्ष का कहना है कि मामला किसी व्यक्ति या जाति का नहीं, बल्कि नैतिकता, पारदर्शिता और हितों के टकराव का है। विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।





