कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयानों ने देश की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। चुनाव आयोग पर उनके लगाए आरोपों की पृष्ठभूमि में अब विभिन्न क्षेत्रों की 272 से अधिक प्रतिष्ठित हस्तियों ने एक खुला पत्र जारी कर अपनी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर इस तरह के हमले गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं।
इस बीच, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी राहुल गांधी के समर्थन में आगे आए हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “राहुल गांधी की राय को चुनाव आयोग की छवि खराब करने से जोड़ना सही नहीं है। हर नागरिक और राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का अधिकार है। राहुल देश के हर नागरिक के मतदान अधिकार की रक्षा की बात कर रहे हैं—यह संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास नहीं है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जज हों या नेता—हर किसी की राय को अंतिम सत्य की तरह देखना ठीक नहीं।
उधर, केरल भाजपा प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राहुल न भारत की परवाह करते हैं, न भारतीयों की। उनका दावा है कि कांग्रेस सांसद का “भारत में राजनीति करना सिर्फ पार्ट-टाइम काम” बनकर रह गया है और उनका ध्यान विदेश यात्राओं पर अधिक केंद्रित है।
उधर जिस खुले पत्र की चर्चा हो रही है, उसमें 16 जज, 123 पूर्व नौकरशाह, 14 राजनयिक और 133 सैन्य अधिकारी शामिल हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने कई मौकों पर चुनाव आयोग पर कठोर टिप्पणी की, यहां तक कि उन्होंने दावा किया कि उनके पास “वोट चोरी” के सौ फ़ीसदी सबूत हैं। पत्र में जनता से चुनाव आयोग के समर्थन में खड़े होने की अपील की गई है और राजनीतिक दलों से कहा गया है कि बिना ठोस प्रमाण के ऐसी बयानबाज़ी से बचें।
यह विवाद अब एक बड़े राजनीतिक विमर्श में बदल चुका है—जहां एक तरफ संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।







