छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। फंड की कमी और विभागीय गड़बड़ियों के कारण परियोजनाएं ठप हैं। इसी बीच खबरें हैं कि मल्टी विलेज ठेकेदारों को बिना काम किए एडवांस भुगतान किया जा रहा है, जबकि सिंगल विलेज ठेकेदारों के भुगतान लगातार रोके जा रहे हैं।
अधिकारियों ने फंड की कमी को वजह बताया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि एक दर्जन से अधिक बड़े ठेकेदारों को बिना काम पूरा किए ही भुगतान जारी किया गया है। वहीं छोटे ठेकेदारों के कामों में “तकनीकी खामियां” बताकर भुगतान रोके जा रहे हैं।
भुगतान रुकने से ठेकेदारों में नाराजगी:
मार्च 2025 के बाद से कई ठेकेदारों को भुगतान नहीं मिला है। सिंगल विलेज ठेकेदारों का कहना है कि उनके काम पूरे होने के बावजूद 50 से 60 प्रतिशत राशि पर आपत्तियां लगाकर रोक दी गई हैं। कुछ मामलों में विभाग ने दस्तावेजी कमी का हवाला देकर भुगतान लटका दिया है।
बाजार से महंगे रेट पर खरीद:
मिशन में उपयोग होने वाले हर आइटम का इंम्पेनलमेंट किया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इन वस्तुओं की खरीद बाजार दर से ज्यादा कीमत पर की जा रही है। इससे मिशन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राशि वापस करने का विवाद:
विभागीय सूत्रों के अनुसार, हाल ही में राज्यांश मद से जारी 351 करोड़ रुपए की राशि कुछ एजेंसियों को भुगतान के बाद ब्लॉक कर दी गई। 15 दिन बाद मिशन कार्यालय ने अप्रयुक्त राशि वापस करने का आदेश जारी कर दिया। बताया जा रहा है कि इस राशि का एक हिस्सा अब कुछ बड़े ठेकेदारों में बांटा जा रहा है।
ठेकेदारों का आरोप:
तीन हजार से अधिक ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि “जल जीवन मिशन अब वसूली मिशन बन गया है।” उनका कहना है कि विभागीय मंत्री को स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा गलत रिपोर्ट दी जा रही है।







