महिलाओं को रूढ़ियों से मुक्त करना समय की मांग: मोहन भागवत

Madhya Bharat Desk
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण को समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उन परंपरागत और पिछड़ी सोच वाली मान्यताओं से मुक्त किया जाना जरूरी है, जो उनके विकास में बाधा बनती हैं।

मोहन भागवत सोलापुर स्थित ‘उद्योगवर्धिनी’ नामक एक गैर-सरकारी संगठन के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संगठन द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की सराहना भी की।

महिलाएं सिर्फ सहयोगी नहीं, समाज की प्रेरणाशक्ति हैं

भागवत ने कहा, “महिला और पुरुष दोनों जीवन भर परिश्रम करते हैं, लेकिन महिला अपनी भूमिका में सिर्फ श्रम नहीं, संस्कारों और प्रेरणा का बीजारोपण भी करती है। बच्चों के मन और नैतिक मूल्यों का निर्माण मातृत्व के स्पर्श से होता है।”

महिला सशक्तिकरण नहीं सिर्फ आवश्यकता, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक संतुलन का विषय नहीं, बल्कि देश की समग्र उन्नति से जुड़ा एक अनिवार्य पहलू है। “ईश्वर ने स्त्री को विशेष क्षमताएं दी हैं, जो पुरुषों से अलग और अधिक व्यापक होती हैं। उनमें पुरुषों जैसे ही सभी गुण भी विद्यमान हैं। इसीलिए वह हर क्षेत्र में समान रूप से सक्षम हैं,” उन्होंने कहा।

‘उन्हें स्वतंत्र छोड़िए, वही समाज को आगे ले जाएंगी’

मोहन भागवत ने यह भी कहा कि पुरुषों को महिलाओं को “ऊपर उठाने” की सोच से बाहर आना चाहिए, क्योंकि यह सोच ही पुरुष अहंकार का परिचायक है। “महिलाओं को सिर्फ अवसर और स्वतंत्रता की ज़रूरत है। जब वे आगे बढ़ती हैं, तो वे पूरे समाज को नई दिशा में ले जाती हैं।”

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