न्याय की राह भले लंबी हो, लेकिन आखिरकार सच सामने आ ही जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां सालों पहले हुई एक नियुक्ति पर अब हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।
राजस्व उप निरीक्षक पद के लिए तय योग्यता स्नातक के साथ पीजीडीसीए थी। भाटापारा निवासी देवेंद्र कुमार साहू ने सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वे पात्रता सूची में शामिल होंगे, लेकिन जब सूची जारी हुई तो उनका नाम न तो पात्र अभ्यर्थियों में था और न ही अपात्रों में। यह स्थिति उनके लिए हैरान करने वाली थी।
इसके बावजूद, 23 मार्च 2013 को नगर पालिका परिषद ने सतीश सिंह चौहान को इस पद पर नियुक्त कर दिया। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद देवेंद्र साहू ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के जरिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान एक अहम तथ्य सामने आया चयनित उम्मीदवार सतीश सिंह चौहान के पिता उसी समय नगर पालिका परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के पद पर कार्यरत थे। इस जानकारी ने पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
मामले की गहन सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 23 मार्च 2013 को जारी नियुक्ति आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस पद के लिए चयन प्रक्रिया को दोबारा निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जाए।
यह फैसला न सिर्फ एक व्यक्ति के हक की लड़ाई का परिणाम है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का भी एक मजबूत संदेश देता है।







