मध्य प्रदेश के चर्चित एमडीएमए ड्रग्स मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। राजस्थान की चौमहला एसीजेएम कोर्ट के आदेश पर आगर-मालवा जिले के दो थाना प्रभारियों (टीआई) सहित 100 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट ने मामले की जांच के बाद पुलिस कार्रवाई को प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना है।
मामला 28 जनवरी 2026 का है, जब आगर-मालवा पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में छापेमारी कर करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की एमडीएमए और अन्य नशीले पदार्थ बरामद करने का दावा किया था। हालांकि, गांव निवासी हामिद खान ने अदालत में परिवाद दायर कर आरोप लगाया कि पुलिस ने शाहिर खान और मनोवर खान को उठाकर बाद में उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया। परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों को छोड़ने के बदले 10 लाख रुपये की मांग की गई थी।
अदालत के आदेश के बाद आगर टीआई शशि उपाध्याय, बड़ौद टीआई रूप सिंह राजपूत सहित 100 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा—
- मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
- प्रदेश नशीले पदार्थों की फैक्ट्रियों और तस्करी का अड्डा बनता जा रहा है।
- जिस पुलिस पर नशे के कारोबार को रोकने की जिम्मेदारी है, वही फर्जीवाड़े में लिप्त नजर आ रही है।
- भाजपा सरकार न तो नशे के रैकेट को खत्म कर पा रही है और न ही भ्रष्ट अधिकारियों पर अंकुश लगा पा रही है।
- निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है, जबकि असली तस्कर खुलेआम कारोबार कर रहे हैं।







