वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और खुद को अजाक्स का अध्यक्ष बताने वाले संतोष वर्मा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वे बेहद तीखे शब्दों में कहते नजर आ रहे हैं कि “कितनों को मारोगे, कितनों को जलाओगे… अब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा।”
हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो किस तारीख और किस स्थान का है। वीडियो में पूरी बात भी उपलब्ध नहीं है, जिससे बयान के संदर्भ पर सवाल उठ रहे हैं।
जब इस वायरल वीडियो को लेकर संतोष वर्मा से सवाल किया गया, तो उन्होंने सफाई दी कि यह बयान उनका निजी नहीं बल्कि नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ का था, जिसे वे अजाक्स की एक आंतरिक बैठक में दोहरा रहे थे। वर्मा के मुताबिक यह वीडियो संगठन की बैठक का हिस्सा है और इसमें आपत्तिजनक कुछ भी नहीं कहा गया।
ब्राह्मण समाज का आक्रोश
इस नए वीडियो के सामने आने के बाद ब्राह्मण संगठनों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के नेता पुष्पेंद्र मिश्रा ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि “ब्राह्मण बेटियों पर दिए गए अपमानजनक बयान के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि जल्द एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो समाज सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।”
उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर संतोष वर्मा को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण किस स्तर से मिल रहा है।
सरकार का बड़ा दावा – अजाक्स अध्यक्ष वर्मा नहीं
मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह स्पष्ट कर दिया है कि अजाक्स के वर्तमान प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा नहीं, बल्कि मुकेश मौर्य हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से दिए गए लिखित जवाब में यह जानकारी सामने आई।
रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी ने भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी संगठनों की कार्यकारिणी की वैधानिकता का निर्धारण शासन द्वारा नहीं किया जाता और न ही उन्हें औपचारिक मान्यता दी जाती है।
अजाक्स अध्यक्ष को लेकर नया विवाद
सरकारी जवाब के बाद अजाक्स में नेतृत्व को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। वर्मा ने मुकेश मौर्य को “फर्जी” करार देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति की जांच होनी चाहिए और धारा-27 के तहत दी गई जानकारी की सत्यता पर सवाल उठाए हैं।

पहले ही मिल चुका है नोटिस
गौरतलब है कि 23 नवंबर को भोपाल में हुए अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में दिए गए बयान को लेकर राज्य सरकार ने संतोष वर्मा को नोटिस जारी किया था। सरकार ने इसे अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन मानते हुए 7 दिन में जवाब तलब किया है। जवाब न देने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
अब सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल नोटिस तक सीमित रहेगा, या सरकार आगे कोई कड़ा कदम उठाएगी?






