जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर साढ़े चार सौ करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद यात्री सुविधाओं और सेवाओं में सुधार नहीं हो पाया है। फ्लाइट्स का लगातार बंद होना यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रहा है। इस मुद्दे पर सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में फिर से सुनवाई हुई, जहां डिवीजन बेंच के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर क्यों न डुमना एयरपोर्ट को ही बंद कर दिया जाए।
हाईकोर्ट ने विमान कंपनियों को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए और राज्य सरकार से भी तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को तय की है। इससे पहले 29 जुलाई को हुई सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने सरकार से एयरपोर्ट के लिए बनाई गई योजनाओं के बारे में पूछा था।
यह मामला 2024 में जबलपुर के नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें शहर की एयर कनेक्टिविटी और डुमना एयरपोर्ट की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। अदालत के हस्तक्षेप से उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकल सकेगा और यात्रियों को बेहतर हवाई सेवाएं मिलेंगी।



