मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। थाना गोधन में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (ASI) प्रमोद पावन ने सरकारी आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि पुलिस महकमे में भीतर ही भीतर चल रही प्रताड़ना और जातिगत भेदभाव का एक भयावह चेहरा उजागर करती है।
मुख्य घटनाक्रम:
प्रमोद पावन का शव मंगलवार सुबह उनके सरकारी आवास में फंदे पर लटका मिला। आत्महत्या से पहले उन्होंने तीन वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाले, जिनमें उन्होंने साफ तौर पर बताया कि वे थाने में पदस्थ टीआई अरविंद भदौरिया और अन्य तीन लोगों की प्रताड़ना से मानसिक रूप से टूट चुके हैं। प्रमोद के अनुसार, उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया और 15 दिनों से थाने से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी गई।
आरोप और दोषी:
प्रमोद ने अपने वीडियो में जिन चार लोगों पर आरोप लगाए हैं, उनमें टीआई अरविंद भदौरिया, टीआई जनफासुल हुसैन, गोधन थाने के ड्राइवर रूपनारायण यादव और रेत व्यापारी बबलू यादव का नाम शामिल है। प्रमोद का कहना था कि इन लोगों ने उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिससे वे आत्महत्या के लिए मजबूर हो गए।
जातिगत भेदभाव का मामला:
भिंड जिले के बबनपुरा गांव निवासी प्रमोद ने वीडियो में यह भी बताया कि उन्हें उनकी जाति के कारण बार-बार नीचा दिखाया गया। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि वे टूट गए। यह घटना पुलिस विभाग में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न की गंभीर स्थिति को उजागर करती है।



