देश में बढ़ते स्ट्रीट डॉग्स के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसी भीड़भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही है, इसलिए इन्हें वहां से हटाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
कोर्ट ने Dog Lovers की ओर से दाखिल याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अब हालात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि देशभर में बच्चों, बुजुर्गों और विदेशी पर्यटकों तक पर कुत्तों के हमले लगातार सामने आ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। अदालत ने अपने पुराने आदेश में बदलाव करने से भी इनकार कर दिया और साफ कहा कि अब सिर्फ कागजी निर्देशों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर असर दिखना चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की एक टिप्पणी काफी चर्चा में रही, जिसमें कहा गया कि “जमीन पर डार्विन का सिद्धांत लागू हो गया है… Survival of the Fittest।” यानी कमजोर और आम लोग खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अदालत ने यह भी संकेत दिए कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खुले में रखने की छूट नहीं दी जा सकती। साथ ही प्रशासन को उन्हें शेल्टर होम भेजने और व्यवस्था सुधारने की प्रक्रिया तेज करने की जरूरत है।







