विष्णुदेव साय की सरकार पर आरोप है कि सरकार के लिए “राजस्व” सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है, चाहे इसके लिए जनता की सेहत ही क्यों न दांव पर लग जाए।
छत्तीसगढ़ में गर्मी ने जैसे ही पारा चढ़ाया, वैसे ही शराब की बिक्री ने भी रफ्तार पकड़ ली और इस रफ्तार ने सीधे सरकार के खजाने को 866 करोड़ रुपये से भर दिया।
अब सवाल सिर्फ मौसम का नहीं, मिजाज का भी है। क्योंकि जहां एक तरफ राज्य में विकास की गति पर सवाल उठते रहते हैं, वहीं शराब से होने वाली कमाई लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है।
शाम ढलते ही शराब दुकानों के बाहर लगने वाली भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री कितनी अधिक होती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं कि तेज गर्मी में शराब का सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन और गंभीर बीमारियों की तरफ धकेल सकता है। बावजूद इसके, इस बढ़ती खपत पर कोई ठोस नियंत्रण या जागरूकता अभियान नजर नहीं आता।
ग्राउंड पर हालात यह हैं कि शराब दुकानों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही, लेकिन अस्पतालों और परिवारों पर इसके असर को लेकर कोई ठोस चर्चा नहीं हो रही।
क्या छत्तीसगढ़ में अब विकास का पैमाना सड़क और रोजगार नहीं, बल्कि शराब से होने वाली कमाई बन गया है?



