नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत के 8 जहाज सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। यह न केवल कूटनीतिक मजबूती का संकेत है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहले 7 जहाजों के सफलतापूर्वक बाहर आने के बाद शनिवार को ‘ग्रीन सान्वी’ नाम का एक और जहाज भी सुरक्षित बाहर निकल गया। इन जहाजों में अधिकतर एलपीजी और कच्चे तेल से भरे टैंकर शामिल थे, जो सीधे भारत की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े हुए हैं।
LPG सप्लाई में मिली राहत
इन जहाजों के सुरक्षित लौटने से देश में एलपीजी की सप्लाई को बड़ा सहारा मिला है। अनुमान के मुताबिक, करीब 2.79 लाख टन एलपीजी भारत पहुंच चुकी है, जो लगभग 2 से 3 दिनों की घरेलू जरूरत को पूरा करने में सक्षम है। यह सप्लाई मुंद्रा, कांडला, मुंबई और न्यू मंगलौर जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक पहुंचाई गई है।
चीन-पाकिस्तान पीछे, भारत आगे
जहां भारत ने अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने में तेजी दिखाई, वहीं अन्य देश अब भी जूझ रहे हैं। चीन के करीब 60-70 टैंकर अब भी होर्मुज क्षेत्र में फंसे बताए जा रहे हैं, जबकि पाकिस्तान ने 20 जहाजों को अनुमति मिलने का दावा किया था, लेकिन अब तक केवल 2 ही कराची पहुंच पाए हैं।
ओमान रूट बना नया रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ओमान तट के रास्ते (ओमानी रूट) का इस्तेमाल बढ़ सकता है। यह विकल्प बाकी फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभा सकता है।
आगे की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज क्षेत्र में भारत के कुल 24 जहाज मौजूद थे। इनमें से 8 जहाज सुरक्षित बाहर आ चुके हैं, जबकि शेष जहाजों को भी जल्द निकालने की कोशिशें जारी हैं।







