रायपुर।“खिलौने और उपहार” की श्रेणी में टेंडर निकाला गया, लेकिन खरीदी जैविक खाद, बीज और कृषि सामग्री की हुई। छत्तीसगढ़ में परंपरागत कृषि विकास योजना और जैविक खेती मिशन के तहत हुई खरीदी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि टेंडर की श्रेणी जानबूझकर बदली गई ताकि वास्तविक कृषि आपूर्तिकर्ता प्रतिस्पर्धा में शामिल न हो सकें और चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके।
आरोप यह भी हैं कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर साल कृषि योजनाओं के नाम पर नकली या घटिया गुणवत्ता के खाद-बीज और कीटनाशकों की आपूर्ति तथा बाजार और बीज निगम की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी का खेल होता है। विपक्ष और शिकायतकर्ताओं का दावा है कि करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के आरोप लगने के बावजूद न तो प्रभावी जांच होती है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होती है।
वर्ष 2026-27 में जैविक खेती की सामग्री खरीदने के लिए जिलों को करीब 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। आरोप है कि खरीदी प्रक्रिया के दौरान जेम (GeM) पोर्टल पर कृषि सामग्री के टेंडर दिव्यांगजन सामग्री, उपहार सामग्री और बैडमिंटन रैकेट जैसी श्रेणियों में प्रकाशित किए गए। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित रही और सात जिलों की खरीदी का बड़ा हिस्सा केवल दो कंपनियों को मिल गया।
आरोपों के मुताबिक, बीज निगम में 471 रुपये में उपलब्ध 25 किलो जैविक खाद को 1100 रुपये में खरीदा गया। इसी तरह जिंक घुलनशील जीवाणु, पोटेशियम गतिशील जीवाणु, माइकोराइजा, ट्राइकोडर्मा और अन्य कृषि सामग्री भी बीज निगम की तुलना में दोगुने या उससे अधिक दाम पर खरीदी गई।
दंतेवाड़ा में करीब 97 लाख रुपये और कोंडागांव में लगभग 1.10 करोड़ रुपये की खरीदी सिद्धार्थ इंटरप्राइजेज को दी गई, जबकि कोरबा में करीब 48 लाख रुपये का कार्य ऑल्विन इंडस्ट्रीज को मिला। इन आवंटनों और खरीदी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की निष्पक्ष जांच और पूरी खरीदी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग तेज हो रही है।





