भारतीय फोटो जर्नलिज्म की दुनिया से एक ऐसी आवाज़ खामोश हो गई, जिसने दशकों तक कैमरे के जरिए देश की आत्मा को दुनिया के सामने रखा। मशहूर फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का 83 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके परिवार ने रविवार, 26 अप्रैल को इस दुखद खबर की पुष्टि की।
पिछले कुछ वर्षों से वह गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके बेटे और जाने-माने फोटोग्राफर नितिन राय के अनुसार, उन्हें प्रोस्टेट कैंसर था, जो धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया। हाल ही में बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया था, जिसके चलते उन्होंने अंतिम सांस ली।
आज शाम 4 बजे उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी श्मशान घाट में किया जाएगा। उनके परिवार में पत्नी गुरमीत और उनके बच्चे नितिन, लगन, अवनी और पुरवाई शामिल हैं।
रघु राय का कैमरा सिर्फ तस्वीरें नहीं खींचता था, बल्कि वह कहानियां कहता था। छह दशकों से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने भारत के सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय पहलुओं को बेहद संवेदनशीलता से दुनिया के सामने रखा।
उनकी सबसे चर्चित और भावुक तस्वीरों में भोपाल गैस त्रासदी की तस्वीरें शामिल हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। उस त्रासदी के दौरान एक मासूम बच्चे की तस्वीर आज भी इंसानी दर्द का प्रतीक मानी जाती है।
उन्होंने कई बड़ी हस्तियों को अपने कैमरे में कैद किया, जिनमें इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा शामिल हैं। मदर टेरेसा पर उनकी मशहूर किताब सेंट मदर आज भी उनके काम की गहराई को दर्शाती है।
उनका सफर 1962 में द स्टेट्समैन शुरू हुआ था। इसके बाद उनके काम को टाइम, लाइफ, नेशनल जिओग्राफिक और द न्यू यॉर्क टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जगह मिली।
रघु राय ने अपने कैमरे के जरिए भारत की सच्चाई, संघर्ष, सुंदरता और भावनाओं को जिस तरह दुनिया तक पहुंचाया, वह उन्हें हमेशा अमर बनाए रखेगा। भारतीय फोटो जर्नलिज्म को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।



