रायपुर।छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की व्यवस्था पहले ही सप्ताह में चरमराती नज़र आ रही है। खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था, लंबी कतारें और तौल प्रक्रिया में धीमापन किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है। इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। मोर्चा ने साफ कहा है कि यदि निर्धारित समय में व्यवस्था नहीं सुधरी तो राज्यभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
किसान मोर्चा के अध्यक्ष अनिल दुबे और दाऊ जी.पी. चंद्राकर समेत कई वरिष्ठ किसान नेताओं ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि सरकार व्यवस्थित धान खरीदी के बजाय व्यापारियों और बिचौलियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जिससे वास्तविक किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मोर्चा के पदाधिकारी—जागेश्वर प्रसाद, दीनदयाल वर्मा, लालाराम वर्मा, चेतन देवांगन, वेगेंद्र सोनवेर, महेंद्र कौशिक, छन्नू साहू, नंदकुमार साहू, विमल ताम्रकार, बृजबिहारी साहू, योगेश पात्रे, जगदम्बिका साहू, भुवनलाल पटेल सहित करीब 50 से अधिक किसान नेताओं ने कहा कि खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था राज्य सरकार की विफलता दर्शाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
“मुख्यमंत्री साय के निर्देशों का जमीन पर पालन नहीं हो रहा है। किसानों की समस्याओं पर सवाल पूछा जाए, तो सरकार भटकाने वाले जवाब देती है।”
किसान संगठनों ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मूल किसानों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान मोर्चा पूरे प्रदेश में खरीदी केंद्रों की निगरानी कर रहा है और लगातार किसानों की शिकायतें मिल रही हैं।
मोर्चा ने चेताया — सुधार नहीं हुआ तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन
किसान मोर्चा ने सरकार से साफ कहा कि अगले 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि इस दौरान धान खरीदी की व्यवस्था सुचारू नहीं की गई, तो मोर्चा जिला-दर-जिला किसानों को साथ लेकर राज्यव्यापी आंदोलन करेगा।
कार्यालय सचिव अशोक कश्यप ने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा बड़े विरोध प्रदर्शन अनिवार्य होंगे।



