राजनांदगांव। सोमनी थाना क्षेत्र में एक किशोरी को गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर गर्भवती बताए जाने और कथित पुलिस प्रताड़ना के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। मामले में थाना प्रभारी सहित संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।
विवाद उस समय और गहरा गया जब पीड़ित पक्ष और कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जिस प्रेग्नेंसी किट के आधार पर शुरुआती जानकारी सामने आई, उसके वितरण से जुड़े व्यक्ति का संबंध भाजपा से है। हालांकि इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही जांच एजेंसियों ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष सार्वजनिक किया है।
नागरिक समूहों का कहना है कि मामले की जांच केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि किट की सप्लाई चेन, विक्रेता और वितरक की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि यदि जांच में किसी भी राजनीतिक या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।

वहीं विपक्ष ने राज्य सरकार से मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने और पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है तथा किसी भी व्यक्ति को साक्ष्य मिलने पर जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जाएगा।
पीड़ित परिवार ने न्याय, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर क्षेत्र में जनाक्रोश बना हुआ है और विभिन्न संगठनों ने पारदर्शी जांच नहीं होने पर आगे आंदोलन की चेतावनी दी है।





