रायपुर।छत्तीसगढ़ में “महतारी अस्मिता रथ यात्रा” को लेकर माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा अब राज्य स्तर पर बड़े किसान सम्मेलन की ओर बढ़ रही है। संगठन ने 29 मार्च को दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र के मोतीपुर में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है।
रथ यात्रा ने कोटगढ़, पिरदा, बोइरडीह, जगदीशपुर, नरसिंहपुर, चनारडीह, रसोड़ा और बसना सहित कई गांवों का दौरा किया। गांव-गांव पहुंच रही इस यात्रा का लोगों ने जोरदार स्वागत किया। “छत्तीसगढ़ी महतारी की जय” और “छत्तीसगढ़ के शोषकों गद्दी छोड़ो” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा, जिससे आंदोलन की भावनात्मक गहराई साफ दिखाई दी।
यात्रा का नेतृत्व कर रहे राज्य निर्माण संग्राम सेनानी लालाराम वर्मा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के लिए वर्षों तक संघर्ष किया गया और अब लक्ष्य शोषण मुक्त राज्य की स्थापना है। उन्होंने कहा कि तुमगांव थाना में “छत्तीसगढ़ महतारी” की प्रतिमा को बंदी बनाए जाने की घटना ने लोगों की भावनाओं को आहत किया है, और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
यात्रा के दौरान लोगों से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी कराए जा रहे हैं, जिसमें मांग की जा रही है कि दोषी अधिकारियों को जेल भेजा जाए। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है।
आदिवासी युवा नेता अशोक कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ के गौरव वीर नारायण सिंह की प्रतिमा के साथ पहले भी अपमान हुआ था, लेकिन संघर्ष के बाद उसे पुनः स्थापित कराया गया। उन्होंने भरोसा जताया कि महतारी की प्रतिमा को भी सम्मानपूर्वक उसके स्थान पर स्थापित किया जाएगा और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।
सभा में चूड़ामणि पटेल, दशरथ चौहान और लक्ष्मी निषाद सहित कई नेताओं ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान किसानों ने शराबबंदी को लेकर सामूहिक संकल्प लिया, जो इस आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है।
रथ यात्रा के साथ-साथ यह आंदोलन अब सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों को जोड़ते हुए एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है।







