सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुई भीषण दुर्घटना ने साफ कर दिया है कि लापरवाही किस तरह मजदूरों की जान पर भारी पड़ रही है। शुरुआती जानकारी में 11 मौतों की पुष्टि हुई थी, जो बढ़कर 12 तक पहुंच चुकी है, जबकि 17 मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा है?
दोपहर करीब 2:30 बजे 600 मेगावॉट यूनिट-1 में हुए इस हादसे के बाद प्रबंधन ने संवेदना जताई और जांच समिति बनाने की बात कही। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी सवाल वही
अगर सब कुछ सही था, तो हादसा क्यों हुआ?
जिम्मेदारी से बच नहीं सकती कंपनी
इस प्लांट का संचालन भले ही ठेका कंपनी के हाथों में था, लेकिन मालिकाना हक और मुनाफा वेदांता लिमिटेड का है। ऐसे में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना आसान नहीं है।
कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में चल रही इस इंडस्ट्री में अगर सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है, तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
मजदूरों की सुरक्षा क्यों आखिरी प्राथमिकता?
घटना में मारे गए और घायल हुए सभी मजदूर ठेका कर्मचारी बताए जा रहे हैं।
यानी काम उनका, जोखिम उनका पर जिम्मेदारी किसकी?
क्या बड़े उद्योगों में मजदूर सिर्फ एक “नंबर” बनकर रह गए हैं?
- क्या प्लांट में नियमित सुरक्षा ऑडिट हुआ था?
- क्या उपकरणों की जांच समय पर की गई थी?
- क्या प्रशासन को संभावित खतरे की जानकारी थी?
- अगर जवाब “हाँ” है, तो हादसा क्यों हुआ?
- अगर “नहीं” है, तो जिम्मेदार कौन?







