बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में फंसे पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जेल में बंद दास की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने कहा कि आर्थिक अपराध जैसे गंभीर मामलों में आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण पाई गई है, इसलिए उन्हें जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जिस पद पर रहते हुए आरोपी को राज्य के खजाने की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी थी, उसी दौरान सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और हेराफेरी के आरोप सामने आए हैं। यह मामला एक सुनियोजित आर्थिक अपराध का उदाहरण है, जिससे राज्य के वित्तीय तंत्र को नुकसान पहुंचा है।
बताया जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब घोटाले की जांच के दौरान पूर्व आबकारी आयुक्त और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पूर्व एमडी निरंजन दास को 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि शराब नीति में बदलाव कर अवैध रूप से कमीशन वसूला गया। एसीबी की जांच में दास को इस पूरे घोटाले के प्रमुख सूत्रधारों में से एक माना गया है।
निरंजन दास की ओर से हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। पहली याचिका जमानत के लिए थी, जबकि दूसरी में आईपीसी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पीएमएलए के तहत की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि इस मामले में 50 से अधिक अन्य आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं, इसलिए दास को भी जमानत मिलनी चाहिए। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
सरकारी पक्ष ने कोर्ट को बताया कि जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के जरिए करीब 18 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई। वहीं, निरंजन दास से जुड़ी 8.83 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही कुर्क की जा चुकी है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी की हिरासत की अवधि अभी लगभग दो महीने ही हुई है, जिसे लंबी कैद नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।







